सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को जमानत देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। ईडी की अपील को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान दिया कि याचिका में जारी कानून को एक उपयुक्त मामले में निर्णय के लिए खुला रखा जाना चाहिए।
अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल को सुनने और रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री को ध्यान से पढ़ने के बाद कहा कि हमें हाई कोर्ट द्वारा प्रतिवादी संख्या 1 (दीपक कोचर) को जमानत देने के लिए पारित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता है।
पिछले साल 25 मार्च को बॉम्बे हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोचर को जमानत दे दी थी और कहा था कि उनके फरार होने या सबूतों से छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है। दिसंबर 2020 में मुंबई की एक विशेष अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज करने के बाद कोचर ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।