सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को डॉक्टरों द्वारा ऑपरेशन कर प्रसव कराने पर गाइडलाइंस बनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिका को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग ठहराते हुए याचिकाकर्ता पर 25000 रुपये का जुर्माना लगाया।
जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को चार हफ्ते के अंदर यह रकम सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में जमा कराने का आदेश दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आप क्या चाहते हैं? आप चाहते हैं कि कोर्ट ये गाइडलाइंस तैयार करे कि ऑपरेशन से प्रसव कैसे हों।
क्या यह जनहित याचिका है? जनहित याचिका का निरीक्षण करने के बाद हमारी राय है कि यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। पीठ में जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस नवीन सिन्हा भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ता रिपल कंसल ने आरोप लगाया कि किसी ठोस नीति के अभाव में स्वास्थ्य नियमों को खुलेआम दुरुपयोग और उल्लंघन किया जा रहा है। कई निजी अस्पताल और डॉक्टर पैसा कमाने के चक्कर में प्रसव ऑपरेशन के जरिए करा रहे हैं।