सुप्रीम कोर्ट ने एचआईवी और रेप पीड़ित गर्भवती महिलाओं के द्वारा एबॉर्शन कराने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह आदेश एम्स की उस रिपोर्ट के बाद दिया है, जिसमें उसने कहा था कि ऐसा करने से महिलाओं की जान को खतरा पहुंच सकता है, अगर ऐसी महिला अपने गर्भ को गिराने का फैसला लेती है।
सुप्रीम कोर्ट से पटना की रहने वाली एक एचआईवी रेप पीड़ित महिला ने गुहार लगाई थी कि उसके 26 हफ्ते के गर्भ को गिराने की मंजूरी दी जाए। कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश देते हुए कहा कि वो महिला को 3 लाख रुपये मुआवजा भी दे।
इससे पहले पीड़ित महिला ने पटना हाईकोर्ट में भी गुहार लगाई थी, जिस पर कोर्ट ने कहा था कि वो टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 के अनुसार 20 हफ्ते की समय सीमा को पार कर लिया था। महिला ने हाईकोर्ट में तब गुहार लगाई थी, जब वो 17 हफ्ते से गर्भवती थी।