अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति बनने के लिए कोई निर्धारित शैक्षिणक योग्यता न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद आश्चर्य व्यक्त किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि क्या कोई गायक, खिलाड़ी, आईएएस आदि भी एएमयू का कुलपति नियुक्त हो सकता है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय से यह जानना चाहा कि आखिर कुलपति की नियुक्ति के क्या प्रावधान है? विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का रेग्यूलेशन क्या कहता है। उस अधिनियम की भावना क्या है। क्या कोई भी व्यक्ति एएमयू का कुलपति बन सकता है।
जवाब में वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि यूजीसी का रेग्यूलेशन फिलहाल एएमयू में प्रभावी नहीं है। एएमयू ने यूजीसी के रेग्यूलेशन को नहीं अपनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुलपति विश्वविद्यालय का अधिकारी होता है न कि प्रोफेसर। राजनयिक, आर्मी जनरल और विशिष्ट व्यक्ति को कुलपति नियुक्ति किया जाता है।
वर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी एएमयू के कुलपति रह चुके हैं। विश्वविद्यालय का कहना है कि यूजीसी का रेग्यूलेशन शिक्षकों के लिए हैं। पीठ ने विश्वविद्यालय से सवाल किया कि क्या कुलपति की नियुक्ति के लिए आवेदन मंगाए जाते हैं? क्या इसके लिए कोई विज्ञापन निकाले जाते हैं? पीठ ने पाया कि कुलपति की नियुक्ति के लिए कोई प्रावधान नहीं हैं। पीठ अब इस मामले पर छह दिसंबर को सुनवाई करेगी।
मालूम हो कि शीर्ष अदालत सैयद अबरार अहमद द्वारा लेफ्टीनेंट जनरल जमीरउद्दीन शाह को कुलपति बनाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि शाह की कुलपति पद पर नियुक्ति यूजीसी रेग्यूलेशन, 2010 के विरुद्ध है।
साथ ही यह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ है जिसमें यूजीसी रेग्यूलेशन, 2015 का पालन करना सभी विश्वविद्यालय के लिए बाध्यकारी कर दिया गया था। एएमयू ने भी इस रेग्यूलेशन को स्वीकारा था।