न्यायपालिका में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की निचली अदालतों में अदालत की कार्रवाई को रिकॉर्ड करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि अदालती कार्यवाही के हर शब्द को रिकार्ड किया जाए।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने यह भी सवाल किया कि क्यों नहीं सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में होने वाली अदालती कार्यवाही को भी रिकार्ड किया जाए। पीठ ने कहा, ‘हम कोर्ट ऑफ रिकार्ड है।
ऐसे में हमारा हर शब्द रिकार्ड होना चाहिए। हमें इसमें कोई परेशानी नहीं नजर आती।’ पीठ ने सभी 24 हाईकोर्ट को अदालत कक्ष के भीतर और अदालत परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा है।
मालूम हो कि गत मार्च महीने में शीर्ष अदालत ने ट्रायल केतौर पर दो निचली अदालतों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था। अब शीर्ष अदालत ने सभी अदालतों और ट्रिब्यूनल तक इसका फैलाव करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि पूर्व आदेश में सिर्फ वीडियो रिकॉर्डिंग की बात थी लेकिन अब ऑडियो भी रिकार्ड होना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्ट को इसे जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के लिए कहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विधि मंत्रालय को एक महीने के भीतर सीसीटीवी की कीमतों और तकनीक से संबंधित मानक बताने के लिए कहा है।
पीठ ने यह भी साफ किया है कि तीसरे पक्ष को यह रिकार्डिंग नहीं दी जाएगी और एक तय समय के बाद रिकॉर्डिंग को डिलीट कर दिया जाएगा। सूचना के अधिकार के तहत रिकॉर्डिंग सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
इस मामले में अमाइकस क्यूरी (न्यायमित्र) और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि 24 हाईकोर्ट में से 12 हाईकोर्ट पर इस विचार कर रही हैं जबकि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा आदि ने अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।