केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू
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रिटायर्ड जजों को लेकर कानून मंत्री किरेन रिजिजू की एक टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद थमता नहीं दिख रहा है। दो दिन पहले इस मामले में 90 पूर्व नौकरशाहों ने एक खुला पत्र लिखा था। पूर्व नौकरशाहों और वकीलों ने उनकी आलोचना की थी। वहीं अब कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को ट्विटर पर वकीलों द्वारा उनका समर्थन करते हुए एक बयान साझा किया है।
सुप्रीम कोर्ट के वकील ने रिजिजू के समर्थन में किया पोस्ट
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता के एक ट्वीट को रीट्वीट किया है। अपने ट्वीट में गुप्ता ने लिखा है कि ‘हम कानून मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा दिए गए बयान का समर्थन करते हैं। हम, अधोहस्ताक्षरी, कानूनी पेशे के नियमित जानकार हैं। हमने मीडिया में आने वाली खतरनाक खबरों को पढ़ा है कि बहुत कम संख्या में वकीलों ने एक बयान जारी कर रिजिजू की टिप्पणियों की निंदा की थी।’
क्या है मामला
ये पूरा विवाद 18 मार्च को एक मीडिया कार्यक्रम में कानून मंत्री द्वारा की गई टिप्पणी से जुड़ा है। जहां उन्होंने कहा था कि कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीश और कुछ कार्यकर्ता जो ‘भारत विरोधी गिरोह’ का हिस्सा हैं और भारतीय न्यायपालिका को विपक्षी दल की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।
वकीलों ने किया था विरोध
उनके इस बयान को लेकर ना सिर्फ वरिष्ठ वकील बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं और पूर्व नौकरशाहों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पिछले हफ्ते, सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले 62 वरिष्ठ अधिवक्ताओं सहित 300 से अधिक वकीलों ने रिजिजू द्वारा की गई टिप्पणियों की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया था।
90 पूर्व नौकरशाहों ने लिखा था पत्र
वहीं, पूर्व नौकरशाहों ने गुरुवार को एक खुले पत्र में कानून मंत्री किरण रिजिजू की कई टिप्पणियों के लिए उनकी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि यह नियुक्तियों की कॉलेजियम प्रणाली और न्यायिक स्वतंत्रता पर सरकार का एक ठोस हमला है। 90 पूर्व नौकरशाहों की ओर से हस्ताक्षरित खुले पत्र में तर्क दिया गया था कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में कार्यपालिका की अनदेखी से जुड़े किसी संकेत को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।