सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर सोमवार को चार सवाल रखे गए। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर सभी पहलुओं पर विचार करेगी।
पांच जजों की बेंच ने कहा कि यह एक गंभीर मसला है, इसपर सुनवाई होनी जरूरी है। इस मुद्दे पर केंद्र के अलावा कुछ और पक्षों के भी सवाल आए, इसपर कोर्ट ने कहा कि 30 मार्च तक लिखित में अपनी अर्जी अटॉर्नी जनरल के पास जमा कर दें।
कोर्ट में रखे पहले सवाल में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत तीन तलाक, हलाला और बहु-विवाह की इजाजत संविधान के तहत दी जा सकती है या नहीं ? दूसरे सवाल में समानता का अधिकार और गरिमा के साथ जीने का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में प्राथमिकता किसको दी जाए?
वहीं तीसरे सवाल में पर्सनल लॉ पर बात किया गया। पर्सनल लॉ को संविधान के अनुच्छेद 13 के तहत कानून माना जाएगा कि नहीं? चौथे सवाल में कहा गया कि क्या तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु-विवाह उन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सही है, जिस पर भारत ने भी दस्तखत किये हैं?
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह संविधान से जुड़ा मामला है। हम लोगों के आस्था की कद्र करते हैं, लेकिन यह सही नहीं है। इसे 20 मुस्लिम देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है।