बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विधान परिषद सदस्यता को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। इस मामले में जवाब देने के लिए कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को चार सप्ताह का समय दिया है।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विधान परिषद सदस्यता को अयोग्य करार देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका में जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी।
Election Commission of India has to file a reply within four weeks
— ANI (@ANI) September 11, 2017
चुनावी हलफनामे में नहीं दी थी यह जानकारी
वकील एमएल शर्मा द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि, नीतीश ने सालों तक चुनावी हलफनामे में यह जानकारी नहीं दी थी कि, उनके खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है। याचिका में कहा गया कि नीतीश कुमार एक स्थानीय कांग्रेसी नेता सीताराम सिंह की हत्या और चार अन्य लोगों को घायल करने के मामले में आरोपी हैं। यह घटना साल 1991 में बाढ़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव से पहले की है।
विधान परिषद की सदस्यता रद्द करने की मांग
याचिका में कहा गया कि, चुनाव आयोग के साल 2002 के आदेश के अनुसार सभी उम्मीदवारों के लिए नामांकन के वक्त हलफनामे में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का जिक्र करना जरूरी है। लेकिन, नीतीश कुमार ने सालों तक अपने हलफनामे में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे का जिक्र ही नहीं किया। याचिका में कहा गया कि चूंकि सालों तक नीतीश कुमार ने इस जानकारी को छिपाए रखा, इसलिए उनकी विधान परिषद की सदस्यता रद्द होनी चाहिए।