उच्चतम न्यायलय ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। जिसे रोहित वेमूला और पायल तडवी की मां ने दायर किया था। याचिका में उन्होंने केंद्र और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में होने वाले जाति आधारित भेदभाव को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई। अदालत ने इसपर केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
वेमूला और तडवी ने जाति आधारित भेदभाव होने की वजह से कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। जहां वेमूला हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीएचडी का छात्र था। वहीं तडवी टीएन टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विशेषज्ञ की परास्नातक की पढ़ाई कर रही थीं। रोहित ने 17 जनवरी, 2016 को और पायल ने इसी साल 22 मई को आत्महत्या की थी क्योंकि कॉलेज में तीन डॉक्टर उसके साथ आदिवासी छात्रा होने के कारण जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करती थीं।
न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना और अजय रस्तोगी की पीठ ने याचिका पर केंद्र को नोटिस भेजकर उससे चार हफ्तों के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है। दोनों मांओं के लिए वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह पेश हुईं। उन्होंने अदालत से कहा कि यूजीसी के नियम हैं लेकिन उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी कैंपस में आत्महत्या के कई मामले देखने को मिल रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने मौलिक अधिकारों विशेष रूप से समानता का अधिकार, जाति के खिलाफ भेदभाव का अधिकार, और जीवन का अधिकार को लागू करने की मांग की है।