सुप्रीम कोर्ट संवेदनशील मामलों की सुनवाई के लिए पीठ के गठन के भारत के प्रधान न्यायाधीश के अधिकार को चुनौती देने वाली पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की याचिका पर शुक्रवार को परीक्षण के लिए तैयार हो गया है। अदालत में इस मसले पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सहयोग करने का आग्रह किया है। अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने यह परीक्षण करने का निर्णय लिया है कि संवेदनशील मामलों में पीठ का गठन चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कोलेजियम द्वारा किया जाना चाहिए या नहीं? हालांकि पीठ ने कहा कि यह कौन तय करेगा कि कौन का मामला संवेदनशील या गंभीर है या और कौन सा नहीं? साथ ही पीठ ने 11 अप्रैल के अपने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि चीफ जस्टिस ही मास्टर ऑफ रोस्टर होते है।
चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस के जिक्र पर आपत्ति
सुनवाई के दौरान दुष्यंत दवे ने पीठों के गठन को लेकर गत 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों के प्रेस कांफ्रेंस का जिक्र किया, तो पीठ ने उन्हें रोकते हुए कहा कि इस मसले को यहां न उठाएं। हम इस तरह की दलीलें नहीं सुन सकते।