सुप्रीम कोर्ट ने पादरी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। पादरी ने कथित तौर पर ईसाई धर्म को एकमात्र सच्चा धर्म बताया था। अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 मार्च को पादरी की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में किसी एक धर्म को एकमात्र सच्चा धर्म बताना गलत है। अदालत ने कहा था कि ऐसा बयान अन्य धर्मों के प्रति अवमानना का संकेत देता है और प्रथम दृष्टया धारा 295A के दायरे में आ सकता है।
उत्तर प्रदेश पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, पादरी ने प्रार्थना सभाओं के दौरान बार-बार ईसाई धर्म को ही सच्चा धर्म बताया, जिससे दूसरे समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। हालांकि जांच के दौरान अवैध धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन अन्य धर्मों की आलोचना के आरोप में चार्जशीट दाखिल की गई।
फादर परेरा की ओर से कहा गया था कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और उनके खिलाफ धारा 295A के तहत कोई अपराध नहीं बनता। वहीं, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि मामला तथ्यों से जुड़ा है, जिसकी जांच ट्रायल के दौरान ही संभव है। अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद मामले की आगे की सुनवाई में यूपी सरकार का जवाब अहम माना जा रहा है।