सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 12 फरवरी की तारीख तय की। मामले में जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर मेरिट के आधार पर और अंतिम रूप से फैसला करेगी।
एडीआर के वकील ने की मांग- तत्काल हो सुनवाई
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स एनजीओ की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह मामला 4 फरवरी को सूचीबद्ध है, लेकिन अन्य मामलों के कारण इस पर सुनवाई होने की संभावना नहीं है। प्रशांत भूषण ने 18 फरवरी को मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार की सेवानिवृत्ति का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले पर तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है क्योंकि यह संविधान पीठ के 2023 के फैसले के तहत आता है।
'चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र समिति की आवश्यकता'
उन्होंने कहा कि 2023 के फैसले में कहा गया है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति केवल सरकार की तरफ से नहीं की जा सकती, बल्कि प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली एक स्वतंत्र समिति की तरफ से की जा सकती है, अन्यथा यह चुनावी लोकतंत्र के लिए खतरा होगा। प्रशांत भूषण ने आगे कहा, 'उन्होंने एक ऐसा अधिनियम लाया है जिसके तहत उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को हटाकर दूसरे मंत्री को नियुक्त किया है, जिससे आयुक्तों की नियुक्ति केवल सरकार की मर्जी पर निर्भर हो गई है। संविधान पीठ ने ठीक यही कहा है कि यह समान अवसर और हमारे चुनावी लोकतंत्र के खिलाफ है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए आपको एक स्वतंत्र समिति की आवश्यकता है।'
याचिकाकर्ता कांग्रेस की जया ठाकुर की ओर से पेश हुए अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कहा कि उन्होंने केंद्र को यह निर्देश देने के लिए आवेदन किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति संविधान पीठ के 2 मार्च, 2023 के फैसले के अनुसार की जानी चाहिए। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रशांत भूषण की दलील और अंतरिम आदेश के उनके अनुरोध का विरोध किया। उन्होंने ने कहा कि शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ने अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।
केंद्र इस मामले में बहस के लिए तैयार- एसजी
उन्होंने कहा कि केंद्र इस मामले में बहस के लिए तैयार है और अदालत इसे अंतिम सुनवाई के लिए तय कर सकती है। 8 जनवरी को शीर्ष अदालत ने कहा कि यह अदालत की राय बनाम कानून बनाने की विधायी शक्ति होगी और इस मुद्दे पर फैसला सुनाने के लिए सहमत हो गई। 15 मार्च, 2024 को शीर्ष अदालत ने 2023 के कानून के तहत नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें सीजेआई को चयन पैनल से बाहर रखा गया था और नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी थी।
एडीआर की याचिका में आरोप लगाया गया कि केंद्र ने नए कानून के तहत चयन समिति के आधार और संरचना को हटाए बिना फैसले को खारिज कर दिया, जो नियुक्तियों में कार्यपालिका के अत्यधिक हस्तक्षेप के बराबर है और चुनाव पैनल की स्वतंत्रता के लिए हानिकारक है।
क्या है नया कानून?
नए कानून के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने 2024 में पूर्व आईएएस अधिकारियों ज्ञानेश कुमार और सुखबीर संधू को चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की सिफारिश की थी। एनजीओ ने इसकी वैधता को चुनौती दी और मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 7 के संचालन पर रोक लगाने की मांग की, जिसमें सीजेआई को शामिल नहीं किया गया है।