मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री
शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी पर
व्यापमं घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाने वाले कांग्रेस नेता के के मिश्रा को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दे दी। शीर्ष अदालत ने मानहानि में दोषी ठहराए गए के के मिश्रा की सजा को रद्द कर दिया।
निचली अदालत ने मिश्रा को दो वर्ष कैद की सजा सुनाई थी और फिलहाल हाईकोर्ट में अपील लंबित थी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में सही तरीके से सुनवाई नहीं हुई। मिश्रा ने 2014 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी पर यह आरोप लगाया था।
मिश्रा ने व्यापम घोटाले में मुख्यमंत्री के परिवार की संलिप्तता का आरोप लगाया था। इस पर सरकार ने मानहानि की याचिका जिला अदालत में दायर की थी। जिला अदालत ने 17 नवंबर, 2017 को उन्हें सुनाई दो साल की सजा और 25 हजार रुपये जुर्माने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इस पूरे प्रकरण को ही खारिज कर दिया।