उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जिला जज द्वारा कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में एक 'जूनियर' न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने शपथ ग्रहण पर रोक लगाने की मांग की थी क्योंकि यह वरिष्ठता के नियम के खिलाफ है।
शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में न्यायिक अधिकारी पद्मराज एन देसाई के शपथ ग्रहण से ठीक आधे घंटे पहले याचिका खारिज कर दी। जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने सुबह 10 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मामले की सुनवाई की और कर्नाटक उच्च न्यायालय में शपथ ग्रहण से आधे घंटे पहले याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील संजय नूली ने सुनवाई के बाद बताया कि उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति के आदेश पर आखिर वक्त में हस्तक्षेप नहीं करता।
शिवमोगा के प्रधान जिला न्यायाधीश आरकेजीएमएम महास्वामीजी ने न्यायिक अधिकारी पद्मराज एन देसाई को कर्नाटक उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाए जाने को वरिष्ठता के आधार पर चुनौती दी थी।
उन्होंने कहा था कि न्यायिक अधिकारी पद्मराज एन देसाई के कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेने पर रोक लगाने की अंतरिम राहत नहीं दी जाती है तो याचिका बेमतलब हो जाएगी और यह पूर्ण न्याय में विफलता के साथ ही संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 के तहत याचिकाकर्ता के मूल अधिकारों का भी स्पष्ट उल्लंघन होगा।
कर्नाटक उच्च न्यायालय के महा पंजीयक द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक न्यायमूर्ति शिवशंकर अमरान्नावर, न्यायमूर्ति एम जी उमा, न्यायमूर्ति वेदव्यासाचार श्रीशानंद, न्यायमूर्ति एच. संजीव कुमार और न्यायमूर्ति पद्मराज एन देसाई को सोमवार सुबह साढ़े दस बजे कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर पद की शपथ लेनी थी।