अदालती कार्यवाही में बाधा डालने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, SC ने दी चेतावनी
ओडिशा के संबलपुर में हाईकोर्ट की एक स्थायी खंडपीठ स्थापित करने की मांग को लेकर ओडिशा के वकीलों द्वारा किए जा रहे विरोध और प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में चेतावनी देते हुए कहा कि ओडिशा के कुछ जिलों में अदालतों में तोड़फोड़ करने और कार्यवाही बाधित करने वालों के खिलाफ वह कड़ी कार्रवाई करेगा। इसमें बार के सदस्य भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, अदालत ने राज्य पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि वह स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह से विफल" रही।
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति ए एस ओका की पीठ ने कहा, 'पीठ के गठन की कोई उच्च उम्मीद नहीं है। यहां तक कि अगर कुछ दूरस्थ संभावना थी, जो अब उनके आचरण के कारण खो गई है।' शीर्ष अदालत ने ओडिशा के पुलिस महानिदेशक और संबलपुर के महानिरीक्षक से कहा कि अगर राज्य पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने में असमर्थ है, तो अदालत वहां अर्धसैनिक बलों को हालात से निपटने के लिए भेज देगी। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि हिंसक विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए और उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
इस दौरान, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पीठ को सूचित किया कि उसने संबलपुर जिला बार एसोसिएशन के 43 आंदोलनकारी अधिवक्ताओं को कथित तौर पर तोड़फोड़ में शामिल होने के लिए निलंबित कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मतदाता प्रोफाइलिंग के आरोप पर चुनाव आयोग के खिलाफ नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और अन्य से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आयोग ने 2015 में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मतदाता सूची से 46 लाख नामों को स्वत: हटा दिया था। हैदराबाद के एक इंजीनियर श्रीनिवास कोडाली की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग मतदाता रिकॉर्ड को आधार से जोड़ने के लिए एक अघोषित सॉफ्टवेयर लगा कर मतदाता प्रोफाइलिंग कर रहा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कोडाली ने पहले तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने उनकी जनहित याचिका खारिज कर दी थी। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने राज्य सरकारों को मतदाता रिकॉर्ड तक पहुंचने और प्रतियां बनाने की अनुमति दी है।
संवेदनशील सूचनाएं मतदाता जानकारी से जोड़ी गईं
याचिकाकर्ता का कहना है कि आयोग ने प्रभावी रूप से एक निगरानी तंत्र का गठन किया है। मतदाताओं के धर्म, जाति, जनजाति, जातीयता, भाषा, पात्रता के रिकॉर्ड, आय और चिकित्सा इतिहास सहित संवेदनशील सूचनाओं को अब मतदाता जानकारी से जोड़ा गया है। यह राजनेताओं के लिए लोगों को ‘हित समूहों’ में विभाजित करने की अनुमति देगा। इससे या तो उन्हें चुनावी प्रक्रिया से चुनिंदा रूप से लक्षित करेगा या उनकी उपेक्षा करेगा, जिससे चुनाव के स्वतंत्र और निष्पक्ष संचालन में हस्तक्षेप होगा।
आंध्र प्रदेश ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने और तेलंगाना के बीच संपत्ति और देनदारियों के समान और तेजी से बंटवारे की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में दावा किया गया है कि संपत्ति के गैर-विभाजन से तेलंगाना को लाभ हुआ है, क्योंकि इनमें से लगभग 91 प्रतिशत हैदराबाद में स्थित हैं। याचिका में शीर्ष अदालत से 'परेंस पैट्रिए' (राष्ट्र के माता-पिता) के रूप में संपर्क किया गया है।
ईडी के समन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची झारखंड सरकार
झारखंड सरकार ने केंद्रीय धन शोधन रोधी जांच एजेंसी द्वारा आपराधिक मामले की जांच करने वाले अपने पुलिस अधिकारियों को जारी समन को रद्द करने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामले को अतिरिक्त महाधिवक्ता अरुणभ चौधरी द्वारा तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की गई। इस पर प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने झामुमो के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की याचिका पर जनवरी में सुनवाई के लिए विचार करने पर सहमति जताई।