सुप्रीम कोर्ट ने एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले दो कलर ब्लाइंड (रंगों में फर्क ना कर पाने वाले) छात्रों को अगले एकेडमिक ईयर के लिए दाखिला देने का आदेश दिया है।
अदालत के इस आदेश ने कलर ब्लाइंड छात्रों के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई करने का रास्ता खोल दिया है।
शीर्ष अदालत ने अपने कदम को प्रगतिशील बताते हुए कहा कि मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों से उसे संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ी।
दोनों छात्रों ने नीट से पहले, वर्ष 2015 में त्रिपुरा सरकार द्वारा आयोजित कराई गई प्रवेश परीक्षा में काफी अच्छे अंक हासिल किए थे।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हम अपीलकर्ता को अकादमिक वर्ष 2018-19 के लिए प्रतिवादी संख्या दो को कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला देने और उस वर्ष के लिए कोटे से दो सीटे कम करने का आदेश देते हैं।
इससे पहले एमसीआई और त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज ने शुरुआत में इन छात्रों को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला देने पर आपत्ति जताई थी क्योंकि प्रवेश परीक्षा में पास होने के बावजूद ये कलर ब्लाइंडनेस से पीड़ित थे।