योगी सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यूपी में हर वर्ष 30,000 सिपाहियों और 3,200 सब इंस्पेक्टरों की भर्ती होगी। राज्य में खाली पुलिस अधिकारियों के पदों को भरने को लेकर यूपी सरकार द्वारा दिए गए रोडमैप को शीर्ष कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर रोडमैप के तहत काम नहीं हुआ तो प्रधान सचिव (गृह) सीधे तौर पर उसके जिम्मेदार होंगे।
मालूम हो कि 17 फरवरी को देशभर में खाली पड़े पुलिस अधिकारियों के पदों पर भर्तियां नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी समेत छह राज्यों को रोडमैप बताने को कहा था। साथ ही अदालत ने इन सभी राज्यों के गृह सचिवों या संयुक्त सचिव से ऊपर के अधिकारियों को अगली सुनवाई में पेश होकर यह बताने को कहा था कि आखिर वे खाली पड़े पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाने जा रहे हैं।
सोमवार को यूपी सरकार की ओर से वकील रवि प्रकाश मेहरोत्रा ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ के समक्ष रोडमैप पेश किया। राज्य सरकार ने बताया कि राज्य में फिलहाल 1,87,790 सिपाही हैं जबकि 1,36,335 पद रिक्त हैं। 34,716 सिपाहियों की भर्ती का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। गत 20 जनवरी को हाईकोर्ट में इस मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया है और इस पर आदेश आना बाकी है।
अगस्त से शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया
योगी आदित्यनाथ
राज्य सरकार ने बताया कि बाकी बचे 1,01,619 रिक्त पड़े पदों के लिए भर्तियों की प्रक्रिया अगस्त से शुरू हो जाएगी। हर वर्ष अगस्त महीने से 30 हजार सिपाहियों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू होगी। राज्य सरकार ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में करीब दो वर्ष का वक्त लगता है लिहाजा सितंबर 2021 तक तमाम खाली पड़े पदों को भर लिया जाएगा। वहीं सब इंस्पेक्टर के 11,376 पदों को जनवरी, 2023 तक भर लिया जाएगा। हर वर्ष 3,200 सब इंस्पेक्टरों की भर्तियां होंगी। नियुक्ति प्रक्रिया जनवरी 2018 से शुरू होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार के इस रोडमैप को पीठ ने मंजूरी दे दी है। लेकिन पीठ ने कहा कि अगर इस रोडमैप के तहत भर्तियां न हुई तो प्रधान सचिव (गृह) सीधे तौर पर इसके जिम्मेदार होंगे। साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि हर वर्ष भर्ती शुरू होने की प्रक्रिया के वक्त काबिज चयन बोर्ड के चेयरमैन को प्रक्र्रिया खत्म होने तक बदला नहीं जाना चाहिए।
अदालती निर्देश के तहत सोमवार को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारी अदालत में पेश हुए। यूपी और कर्नाटक सहित कुछ अन्य राज्यों के रोडमैप पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी। वहीं पश्चिम बंगाल आदि द्वारा रोडमैप न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।
अदालत मनीष कुमार द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, देश भर में कुल क्षमता का 24 फीसदी पद रिक्त हैं। इनमें आईजी से लेकर सिपाही तक के पद हैं। याचिका में यह भी गुहार की गई कि हिंसक प्रदर्शनों की वजह से सार्वजनिक संपत्तियों और पुलिस बल सहित अन्य लोगों की जान का खतरे को देखते हुए इसके संरक्षण के लिए कानून बनाया जाए।