देश की सर्वोच्च अदालत ने बिहार की रहने वाली महिला की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें कि, महिला अपनी बहन की जगह पर सीटीईटी की परीक्षा देने पहुंची थी, जहां जांच के दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। इससे पहले आरोपी महिला की याचिका निचली अदालत और पटना हाईकोर्ट से भी खारिज हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जो अपनी बड़ी बहन की जगह केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) देने पहुंची थी। कोर्ट ने कहा कि मामले की प्रभावी जांच के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
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जांच में सहयोग करने के लिए आत्मसमर्पण करें- कोर्ट
जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि महिला को जांच में सहयोग करने के लिए पुलिस के सामने सरेंडर करना चाहिए। महिला की पहचान शारदा कुमारी के रूप में हुई है, जो बिहार के दरभंगा जिले के बहादुरपुर गांव की रहने वाली है। पुलिस के मुताबिक, वह अपनी बड़ी बहन की जगह सीटीईटी परीक्षा देने पहुंची थी लेकिन वहां उसकी बायोमेट्रिक और आधार डिटेल्स से पहचान उजागर हो गई।
आरोपी महिला पर कई धाराओं में केस दर्ज
मामले में पुलिस ने बताया कि शारदा ने परीक्षा केंद्र पर ही अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इसके बाद उसके खिलाफ समस्तीपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत धोखाधड़ी और पहचान छुपाने जैसे गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
निचली अदालत, हाईकोर्ट के बाद 'सुप्रीम' झटका
शारदा की अग्रिम जमानत याचिका पहले समस्तीपुर की निचली अदालत और फिर 23 अप्रैल को पटना हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे राहत देने से इनकार कर दिया है।
बता दें कि, सीटीईटी परीक्षा साल में दो बार सीबीएसई की तरफ से आयोजित की जाती है, जिससे केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) जैसे केंद्रीय स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की जाती है।