सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विवादित 2023 फिल्म 'द केरला स्टोरी से जुड़ी कई याचिकाओं पर कार्यवाही बंद कर दी। हालांकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) द्वारा फिल्मों के सर्टिफिकेशन को चुनौती देने से जुड़े कानूनी सवाल को खुला छोड़ दिया।
कोर्ट ने क्या कहा?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली बेंच ने शुक्रवार को दर्जनों ऐसे मामलों का निपटारा किया, जो या तो कोविड-19 के दौरान दायर किए गए थे या समय बीतने के साथ बेअसर हो गए थे। 'द केरला स्टोरी' के सीबीएफसी सर्टिफिकेट को रद्द करने की मांग वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि ये याचिकाएं अब बेअसर हो गई हैं।
फिल्म के प्रोड्यूसर्स, सनशाइन पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड और विपुल अमृतलाल शाह की ओर से दायर तीसरी याचिका वापस ले ली गई। इस याचिका में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन सरकार के फिल्म पर बैन लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
पाशा ने कोर्ट को क्या बताया?
पाशा ने बताया कि केरल हाई कोर्ट ने फिल्म से जुड़ी एक रिट याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सीबीएफसी द्वारा फिल्म को सर्टिफिकेट देने के खिलाफ ऐसी याचिका दायर नहीं की जा सकती।
जस्टिस बागची ने क्या कहा?
जस्टिस बागची ने कहा, 'इस मामले पर सुनवाई के लिए किसी दूसरी फिल्म का इंतजार करना होगा। कोई ऐसी फिल्म जो विवादित हो, तब हम उस सवाल पर विचार करेंगे।' पाशा ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने खास तौर पर फिल्म का सर्टिफिकेट रद्द करने की मांग की थी। इसके साथ ही बताया कि फिल्म अभी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने शुरू में हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने यह देखते हुए याचिका का निपटारा कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को देख रहा है।
पाशा ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया कि नफरत फैलाने वाली (हेट स्पीच) फिल्मों के लिए गाइडलाइंस तय की जाएं। सीजेआई ने जवाब दिया, 'ठीक है, आप गाइडलाइंस की मांग करते हुए एक विस्तृत रिट याचिका दायर करें।
द केरल स्टोरी को लेकर विवाद क्यों?
सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित और विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित फिल्म "द केरल स्टोरी" 2023 में रिलीज होने के बाद एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का कारण बनी थी। फिल्म में शुरू में दावा किया गया था कि केरल की लगभग 32,000 महिलाओं का धोखे से इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराया गया और उन्हें इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। इस दावे की काफी आलोचना हुई थी।