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पुलिस पर जबरन वसूली का आरोप: SC ने रद्द की अग्रिम जमानत, कहा- जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो क्या होगा?

Wed, 03 Jun 2026 05:14 PM IST
Asmita Tripathi पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कथित जबरन वसूली मामले में तीन पुलिस अधिकारियों की अग्रिम जमानत रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि जब कानून लागू करने वाले ही वसूली करने लगें तो जनता का भरोसा टूटता है। पढ़ें पूरी खबर

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कथित जबरन वसूली के तीन पुलिस अधिकारियों आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा, जब कानून लागू करने वाले अधिकारी जबरन वसूली करने वाले बन जाते हैं, तो नागरिक संदेह की नजर से देखता है और दुविधा में पड़ जाता है।

न्यायमूर्ति संजय कुमार और के विनोद चंद्रन की पीठ ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की ओर से पारित आदेश को 'अस्पष्ट' बताते हुए रद्द कर दिया। पीठ ने कहा, विरोध करना तत्काल प्रतिशोध को न्योता देना है और एकमात्र विकल्प वर्दीधारी अधिकारियों के सामने चुपचाप आत्मसमर्पण करना है।

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क्या है पूरा मामला
इस मामले में, शिकायतकर्ता अपनी बेटी के साथ मुंबई से हापा दुरंतो एक्सप्रेस में यात्रा कर रहा था। उन्हें और उनके बहनोई को, जो उन्हें छोड़ने आए थे। रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ का पता लगाने वाले पुलिसकर्मियों ने हिरासत में ले लिया। यात्री के सामान की तलाशी के दौरान 14 ग्राम सोने की छड़ और 31,900 रुपये नकद बरामद हुए। संतोषजनक स्पष्टीकरण देने के बावजूद, वर्दीधारी पुलिसकर्मियों में से एक तीनों को पास के एक कमरे में ले गया, जहां उन्हें धमकाया गया और मौखिक रूप से गाली दी गई। उन्हें सोने की छड़ के बदले नकद देने के लिए मजबूर किया गया।

शिकायतकर्ता ने एफआईआर दर्ज कराई जिसके बाद सत्र न्यायालय ने अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इस मामले में उच्च न्यायालय ने जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद तीनों अधिकारियों को अग्रिम जमानत दे दी, जिसमें पाया गया कि आरोपियों ने पहचान पत्र पहन रखे थे।

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सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर क्या कहा? 

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पीठ ने कहा 'हमें आश्चर्य है कि उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि उनमें संकट का कोई संकेत नहीं है, विशेषकर तब जब फुटेज में उनके भाव स्पष्ट नहीं हैं। हमने यह भी देखा कि दोनों वयस्क आगे बढ़ रहे थे, उनमें से एक अपने हाथों से बेचैनी से इशारे कर रहा था जबकि बच्चा पीछे-पीछे चल रहा था, जो संकट का स्पष्ट संकेत है।' कोर्ट ने आगे कहा कि हमें यह भी पता चला है कि बंद कमरे के अंदर बिताया गया समय पुलिसकर्मियों के लिए शिकायत में उल्लिखित कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त था, जिसे हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि किसी भी स्थिति में आपराधिक मुकदमे में साबित करना होगा।'

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