समय की कमी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी की सफाई को लेकर वर्ष 1985 में दायर जनहित याचिका को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पास भेज दिया है। मालूम हो कि गंगा की सफाई के कुछ पहलुओं पर एनजीटी वर्ष 2014 से सुनवाई कर रहा है।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि ठोस कचरा और औद्योगिक प्रदूषण के मसले पर एनजीटी रोजाना सुनवाई कर रहा है लिहाजा गंगा के प्रदूषण के अन्य कारकों के मसले को भी एनजीटी द्वारा सुना जाना चाहिए।
पीठ ने एनजीटी को हर छह महीने में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत पर्यावरणविद् एमसी मेहता द्वारा वर्ष 1985 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर उन्हें किसी तरह की परेशानी हुई तो वह शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।