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Supreme Court: यूनिटेक के प्रमोटर की पत्नी प्रीति चंद्रा को झटका, हाईकोर्ट से मिली जमानत पर 'सुप्रीम' रोक

Fri, 16 Jun 2023 07:34 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रीति चंद्रा को बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली थी। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में कोर्ट ने जमानत दी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने आदेश को चुनौती देने के लिए ईडी को समय दिया था।
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Supreme Court - फोटो : ANI
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विस्तार
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यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा की पत्नी प्रीति चंद्रा को बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली थी। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में कोर्ट ने जमानत दी थी। हालांकि, अब चंद्रा को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने जमानत पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।  

गौरतलब है, प्रीति चंद्रा को बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली थी। मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में कोर्ट ने जमानत दी थी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने आदेश देते हुए कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आदेश को चुनौती देने के लिए समय मांगे जाने के बाद यह आदेश 16 जून तक प्रभावी नहीं होगा। आदेश देते हुए जमानत अर्जी को मंजूरी दे दी। 

ईडी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। उसने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें चंद्रा को जमानत देने का आदेश दिया गया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने चंद्रा को जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली ईडी की याचिका पर नोटिस जारी किया। 

कोर्ट ने प्रीति चंद्रा को जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी है। 

यह है मामला

यूनिटेक समूह और इसके प्रवर्तकों के खिलाफ घर खरीदारों की शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज कई प्राथमिकियों से धन शोधन का यह मामला उपजा था। ईडी ने इस विषय में एक निचली अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।

ईडी ने आरोप लगाया है कि आवासीय परियोजना के लिए घर खरीदारों से एकत्र किए गए धन को उस उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया गया और इस तरह उनके साथ धोखाधड़ी की गई तथा आरोपियों ने धनशोधन का अपराध किया है। प्रीति चंद्रा के खिलाफ यह आरोप है कि उन्हें अपराध की आय के रूप में अपनी कंपनी प्राकौसली इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड में 107 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन धन के उपयोग का खुलासा नहीं किया गया। निचली अदालत ने आरोपों की गंभीरता के मद्देनजर सात नवंबर को उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने यात्री को मुआवजा देने के उपभोक्ता अदालत के आदेश को किया रद्द  
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रेन में यात्रा के दौरान होने वाली चोरी को रेलवे की ओर से सेवा में कोताही नहीं कहा जा सकता। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की अवकाशकालीन पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि यदि यात्री ट्रेन में अपना कोई सामान खो देता है तो वह इसके लिए भारतीय रेलवे से मुआवजे का दावा नहीं कर सकता है। शीर्ष अदालत ने एक व्यक्ति को एक लाख रुपए का मुआवजा देने के उपभोक्ता अदालत के आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। उस यात्री ने ट्रेन में सफर के दौरान एक लाख रुपए की राशि खो दी थी।

सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि हम यह समझने में विफल हैं कि चोरी को किसी भी तरह से रेलवे की सेवा में कोताही कैसे कहा जा सकता है। यदि यात्री अपने सामान की रक्षा करने में सक्षम नहीं है तो रेलवे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

बता दें कि जिला उपभोक्ता फोरम ने यह देखते हुए उत्तर प्रदेश के इस व्यक्ति को मुआवजे देने का आदेश पारित किया था कि उसकी कमर के चारों ओर बंधे बेल्ट में रखी नकदी चोरी हो गई थी।

12 जून, 2015 को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के उस फैसले को बरकरार रखा था जिसमें जिला फोरम के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। रेलवे ने उपभोक्ता फोरम के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने रेलवे की अपील को स्वीकार करते हुए उपभोक्ता फोरम के आदेश को रद्द कर दिया।
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गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में आरोपी बद्री को राहत नहीं

गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में आरोपी पूर्व सलाहकार बद्री श्रेष्ठ की अग्रिम जमानत की याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस राजेश बिंदल की अवकाशकालीन पीठ ने इनकार कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिलने पर बद्री श्रेष्ठ ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था ऐसे मामले में जहां राजनेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने की हेराफेरी की गई हो, वहां आरोपी अग्रिम जमानत के हकदार नहीं हैं। गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की रिपोर्ट सबसे पहले गोमती नगर थाने में 2017 में दर्ज की गई थी। मामले की जांच 30 नवंबर, 2017 को सीबीआई को सौंप दी गई थी।  
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