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सुप्रीम कोर्ट में गरीबों को आरक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अब 8 अप्रैल को सुनवाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Thu, 28 Mar 2019 11:55 AM IST
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supreme court - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आठ अप्रैल को सुनवाई की जाएगी।


 

न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया था। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि वह और अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के समक्ष एक अन्य मामले में बहस कर रहे हैं।


याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि इस मामले की सुनवाई संविधान पीठ को ही करनी चाहिए।

पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद इस मामले को आठ अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दिया।


शीर्ष अदालत ने 11 मार्च को कहा था कि वह इस समय सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण के मुद्दे को संविधान पीठ को सौंपने के बारे में कोई आदेश पारित करने के पक्ष में नहीं है। पीठ ने कहा था कि 28 मार्च को इस बारे में विचार किया जाएगा कि क्या इसे संविधान पीठ को सौंपने की आवश्यकता है।


शीर्ष अदालत ने इससे पहले 10 फीसदी आरक्षण के सरकार के निर्णय पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था लेकिन उसने इस कानून की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था। 


इससे पहले कोर्ट में सरकार ने भी अपने इस फैसले का बचाव किया था।


अदालत में जमा करवाए गए हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा था कि संविधान में संशोधन करके गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने से संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं किया गया है। साथ ही अदालत के 1992 में आरक्षण को 50 फीसदी तक सीमित करने के फैसले का भी उल्लंघन नहीं हुआ है।

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