अब बाजार में खरीदारी और भुगतान मोबी कैश बटुए से होगा। नोटबंदी के बाद कैशलेस अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए एसबीआई और बीएसएनएल ने मिलकर मोबी कैश बटुआ विकसित किया है। इससे उपभोक्ता का खाता नंबर, मोबाइल नंबर और आवाज कनेक्ट होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में कैशलेस ट्रांजेक्शन पर जोर देने के लिए कारगर पहल की जा रही है। माना जा रहा है कि 25 दिसंबर से देश में यह सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
नोटबंदी के बाद सरकार कैशलेस भुगतान पर जोर दे रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट फोन और अशिक्षा इस राह में बड़ी बाधा बनी है। ग्रामीण इलाकों में अधिकांश लोग स्मार्ट फोन के प्रयोग से अनजान हैं। साथ ही गांवों में टूजी सुविधा ही संचालित है। ऐसे में सरकार के निर्देश पर बीएसएनएल और एसबीआई ने मोबी कैश बटुआ तैयार किया है।
यह कोई एप नहीं है, बल्कि एक सुविधा है। इसके तहत उपभोक्ता के मोबाइल नंबर को बैंक खाते से जोड़ दिया जाएगा। लोग बैंक में जाकर अपने खाते से मोबाइल नंबर और अपनी आवाज का नमूना जुड़वाएंगे। भुगतान के लिए उपभोक्ता बीएसएनएल की ओर से दिए गए नंबर पर कॉल करेंगे और कॉल के दौरान उपभोक्ता दुकानदार का एकाउंट नंबर और भुगतान की राशि बताएंगे। इसके बाद सिस्टम आवाज को पहचानकर भुगतान कर देगा।
बीएसएनएल के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो वर्तमान में यह व्यवस्था बिहार, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा में लागू है। बीएसएनएल के जिला दूरसंचार प्रबंधक राजेश कुमार बताते हैं कि मोबी कैश बटुआ बनाया गया है। जल्द इसकी शुरुआत होगी। कैशलेस अर्थव्यवस्था की राह में यह अनूठी पहल है। शुरुआत में यह व्यवस्था केवल बीएसएनएल उपभोक्ताओं के लिए होगी। बाद में इसे अन्य कंपनियों के उपभोक्ताओं को भी दिया जाएगा।