महाराष्ट्र सदन से सावित्री अहिल्याबाई की प्रतिमा हटाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सावित्रीबाई फुले, अहिल्याबाई होल्कर हमारे लिए पूजनीय और सम्मानित हैं। हर देशवासी उनके प्रति सम्मान रखता है। उनका अपमान नहीं होगा। हमने इस बारे में संबंधित अधिकारियों से बात की है, वे इसका खुलासा करेंगे।
देश की राजधानी दिल्ली में महाराष्ट्र सदन में वीर सावरकर की जयंती मनाने के लिए रविवार को सावित्रीबाई फुले और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा हटा दी गई। इससे महाराष्ट्र में खासा सियासी विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने प्रतिमा हटाने को लेकर शिंदे-फडणवीस सरकार की जमकर खिंचाई की।
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एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र की दो कर्तव्यवान बहनों की प्रतिमा मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के सामने हटाई गई। इससे महिलाओं के बारे में राज्य सरकार की मंशा का पता चलता है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर के कार्यक्रम को लेकर कोई विरोध नहीं है लेकिन उस जगह से सावित्रीबाई फुले और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा दिखाई क्यों हटाई गई। इतना द्वेष क्यों? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने भी महाराष्ट्र सदन से सावित्रीबाई फुले और अहिल्याबाई की मूर्तियों को हटाने की निंदा की। कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए।
पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ एनसीपी नेता छगन भुजबल ने कहा कि महाराष्ट्र सदन से महापुरुषों की प्रतिमा हटाने की घटना दुखद है। प्रतिमा हटाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और इस बारे में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को हस्तक्षेप करना चाहिए।
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मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की प्रतिक्रिया
वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सावित्रीबाई फुले, अहिल्याबाई होल्कर हमारे लिए पूजनीय और सम्मानित हैं। हर देशवासी उनके प्रति सम्मान रखता है। उनका अपमान नहीं होगा। हमने इस बारे में संबंधित अधिकारियों से बात की है, वे इसका खुलासा करेंगे।