1984 में कांग्रेस में हुए शामिल
सन् 1984 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हालांकि तीन साल तक पार्टी के राज्यसभा सांसद बने रहे। बताया जाता है कि बोफार्स घोटाले के मामले के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1988 में जनता दल में शामिल हो गए और 1989 में अलीगढ़ से सांसद बने। सन् 1990 से 1990 तक केंद्रीय पर्यटन एवं संसदीय राज्यमंत्री रह चुके हैं।
साल 2004 में भाजपा में शामिल हो गए और लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा लेकिन इसमें उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह से हार का सामना करना पड़ा था। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इससे पहले राजस्थान के विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी। वर्ष 2017 को बिहार के राज्यपाल का पद संभालने के पहले वह भाजपा के किसान मोर्चा के प्रभारी थे।
जम्मू कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त होने पर सत्यपाल मलिक बोले कि कश्मीरी नेताओं से मेरे निजी संबंध है, पीएम की सोच पर अमल करना है और लोगों का भरोसा जीतना है। कश्मीर की जनता पर मुझे पूरा भरोसा है। वह एनएन वोहरा की जगह लेंगे, जो दस साल से वहां राज्यपाल हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी राजनीतिक व्यक्ति को सूबे का राज्यपाल बनाया गया है। अब तक जम्मू-कश्मीर में पूर्व सैन्य अधिकारी या अफसरशाह को ही राज्यपाल बनाया जाता रहा है।