सना की शिकायत पर सीबीआई ने 15 अक्तूबर को अस्थाना के खिलाफ दो करोड़ की घूसखोरी के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। उधर, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने इसी मामले में सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और एजेंसी में नंबर दो अधिकारी अस्थाना को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया है।
सीवीसी रिटायर्ड जस्टिस पटनायक की निगरानी में सीबीआई के इन दोनों शीर्ष अधिकारियों के आरोपों की जांच कर रहा है। मीट व्यापारी मोईन कुरैशी से जुड़े एक मामले में सना को राहत देने के लिए अस्थाना पर घूस लेने का आरोप है।
वहीं, अस्थाना ने सीवीसी और कैबिनेट सचिव को आलोक वर्मा पर ही घूस लेने का आरोप लगाते हुए चिट्ठी लिखी थी। मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि केंद्र ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजकर सीवीसी से जांच कराने का फैसला किया।
सरकार के इस फैसले के खिलाफ आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। शीर्ष अदालत ने सीवीसी से जांच को जारी रखने और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी रिटायर्ड जस्टिस पटनायक को सौंपी है।