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Custodial Death: पिता-पुत्र की हिरासत में मौत के मामले में नौ पुलिसकर्मी दोषी, सजा पर 9 अप्रैल को आएगा फैसला

Mon, 23 Mar 2026 06:08 PM IST
Himanshu Singh Chandel न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

तमिलनाडु के साथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में छह साल बाद अदालत ने 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है। 2020 में हिरासत में पिता-पुत्र की मौत ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था। जांच में पुलिस की बर्बरता और सबूत मिटाने की कोशिश सामने आई। अदालत 9 अप्रैल को सजा सुनाएगी। 
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हिरासत में मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तमिलनाडु के चर्चित साथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में करीब छह साल बाद बड़ा फैसला आया है। मदुरै की प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने पिता-पुत्र की हिरासत में मौत के मामले में सभी 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है। यह मामला 2020 में पूरे देश को झकझोर देने वाला था। अब अदालत ने साफ कर दिया है कि दोषियों को सजा भी मिलेगी, जिसकी घोषणा 9 अप्रैल को की जाएगी।
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अदालत ने व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की मौत के मामले में इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल समेत सभी आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने कहा कि सबूतों और गवाहों के आधार पर यह साबित हुआ कि हिरासत में गंभीर यातना दी गई थी। यह फैसला लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे परिवार और देश के लिए अहम माना जा रहा है।

क्या था पूरा मामला और कैसे हुई मौत?
जून 2020 में लॉकडाउन के दौरान जयराज और उनके बेटे को दुकान देर तक खोलने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि थाने में दोनों को पूरी रात बेरहमी से पीटा गया और गंभीर यातनाएं दी गईं। हालत बिगड़ने के बावजूद उन्हें इलाज नहीं मिला और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कुछ ही दिनों में दोनों की मौत हो गई।
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क्या जांच में सामने आईं चौंकाने वाली बातें?
जांच में खुलासा हुआ कि पुलिस ने रिकॉर्ड में हेरफेर किया और सबूत मिटाने की कोशिश की। मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान में गंभीर चोट और यातना की पुष्टि हुई। यहां तक कि गवाहों को डराने और दबाव बनाने की बात भी सामने आई। इसके बाद CBI ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

कितने पुलिसकर्मी दोषी पाए गए?
इस मामले में कुल 10 पुलिसकर्मी आरोपी थे, लेकिन एक विशेष सब-इंस्पेक्टर की कोविड के दौरान मौत हो गई थी। बाकी 9 पुलिसकर्मियों को अदालत ने दोषी करार दिया है। इनमें एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर, हेड कॉन्स्टेबल और कई कॉन्स्टेबल शामिल हैं। सभी के खिलाफ हत्या और साजिश जैसे गंभीर आरोप साबित हुए।
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देशभर में क्यों मचा था बवाल?
यह मामला सामने आते ही पूरे तमिलनाडु और देश में गुस्सा फैल गया था। सोशल मीडिया पर न्याय की मांग तेज हो गई थी। इस घटना की तुलना अमेरिका के जॉर्ज फ्लॉयड केस से भी की गई थी। लोगों ने पुलिस सुधार की मांग उठाई और कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। अदालत ने सभी दोषियों को सजा सुनाने के लिए 9 अप्रैल की तारीख तय की है। माना जा रहा है कि यह फैसला पुलिस हिरासत में होने वाली हिंसा के खिलाफ एक बड़ा संदेश देगा। इस केस ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब सभी की नजर सजा के एलान पर टिकी है।

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