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संजय राउत ने की पीएम मोदी की तारीफ: विजय माल्या को क्यों बताया बेगुनाह, बोध कीर्तन किताब में क्या-कुछ लिखा?

Fri, 30 Oct 2026 07:09 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

संजय राउत ने अपनी नई किताब बोध कीर्तन में विजय माल्या को धोखेबाज मानने से इनकार किया है। उन्होंने माल्या को मिलनसार और देशभक्त बताते हुए कहा कि बैंकों को उनकी मदद करनी चाहिए थी। इसी किताब में राउत ने पीएम मोदी के गैर-राजनीतिक भाषणों की तारीफ भी की है। आखिर माल्या के बचाव में उन्होंने क्या तर्क दिए? मोदी के किस भाषण को खास बताया? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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संजय राउत, शिवसेना यूबीटी के नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सांसद संजय राउत अपनी नई किताब बोध कीर्तन में कुछ ऐसे विचार लेकर आए हैं, जो राजनीतिक और कारोबारी जगत में चर्चा का विषय बन सकते हैं। किताब में उन्होंने भगोड़े आर्थिक अपराधी घोषित किए जा चुके विजय माल्या का बचाव किया है। राउत ने माल्या को धोखेबाज मानने से इनकार करते हुए कहा है कि उनका कारोबार डूब गया था और कर्ज नहीं चुका पाने के बाद वह भारत से चले गए। दिलचस्प बात यह है कि इसी किताब में राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गैर-राजनीतिक भाषणों की तारीफ भी की है। उन्होंने अयोध्या के दीपोत्सव पर मोदी के भाषण को खास बताया है।

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विजय माल्या को लेकर संजय राउत ने अपनी किताब में क्या दावा किया है?
संजय राउत ने किताब के एक अध्याय माल्या ची गोष्ट यानी माल्या की कहानी में विजय माल्या के बारे में अपने अनुभव लिखे हैं। उन्होंने दावा किया है कि माल्या कभी धोखेबाज नहीं थे। राउत के मुताबिक, संसद में माल्या उनके आसपास बैठते थे और सेंट्रल हॉल में भी दोनों की बातचीत होती थी। इस दौरान उन्होंने माल्या को मिलनसार, हंसमुख और आकर्षक व्यक्तित्व वाला व्यक्ति पाया। राउत ने लिखा है कि माल्या की शानदार जीवनशैली उनके कारोबारी कामकाज का हिस्सा थी, इसे उनकी गलती नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि माल्या में संसद के कई लोगों से ज्यादा देशभक्ति की भावना थी। राउत के अनुसार, माल्या खुले विचारों वाले और उदार व्यक्ति थे तथा उनका किसी को धोखा देने का इरादा नहीं था। ये राउत के निजी अनुभव और उनके विचार हैं।
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क्या संजय राउत ने माल्या को भगोड़ा मानने से भी इनकार किया है?
राउत ने अपनी किताब में विजय माल्या को भगोड़ा कहे जाने पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि माल्या का कारोबार डूब गया था और कर्ज चुकाने में असमर्थ होने के बाद वह भारत से चले गए। राउत ने इसे धोखाधड़ी के बजाय कारोबारी असफलता के तौर पर पेश किया है। उन्होंने लिखा है कि जब माल्या का कारोबार मुश्किल में था, तब बैंकों को उनकी मदद करनी चाहिए थी, न कि उन्हें देश छोड़ने की स्थिति तक पहुंचाना चाहिए था। राउत के मुताबिक, माल्या ने कर्ज माफी नहीं, बल्कि कुछ समय की राहत मांगी थी। किताब में उन्होंने यह भी कहा है कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कई उद्योगपतियों को कर्ज में राहत दी, जबकि माल्या को भी अस्थायी छूट दी जा सकती थी। हालांकि, यह राउत का पक्ष है। माल्या भारत छोड़ने के बाद ब्रिटेन में रह रहे हैं। उन्हें 2019 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। भारत में उनके खिलाफ कथित कर्ज चूक और धनशोधन से जुड़े मामलों को लेकर प्रत्यर्पण की मांग की गई है।

पीएम मोदी के बारे में संजय राउत ने किताब में क्या लिखा है?
संजय राउत ने अपनी किताब के एक अन्य अध्याय दीपस्तंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों पर भी विचार रखे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के राजनीतिक और गैर-राजनीतिक भाषणों के बीच अंतर बताया है। राउत का कहना है कि मोदी के राजनीतिक भाषणों में कई बार प्रभाव या गहराई की कमी महसूस होती है, लेकिन उनके गैर-राजनीतिक भाषण सुनने और पढ़ने में अच्छे लगते हैं। उन्होंने खास तौर पर अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का जिक्र किया है। राउत के मुताबिक, इस भाषण में प्रधानमंत्री ने भगवान राम के आदर्शों को जिस तरह प्रस्तुत किया, वह भावनात्मक और प्रभावशाली था। उन्होंने इसे शब्दों में रोशनी का त्योहार बताने जैसा बताया है। राउत ने लिखा है कि प्रधानमंत्री ने भगवान राम के आदर्शों को सभी भारतीयों के लिए मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में पेश किया।
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बोध कीर्तन में और क्या खास है और इसका लोकार्पण कब होगा?
संजय राउत की आगामी किताब बोध कीर्तन शनिवार को लोकार्पित की जाएगी। इस कार्यक्रम में ठाकरे बंधुओं के मौजूद रहने की बात कही गई है। किताब में राउत ने अपने निजी अनुभवों, मुलाकातों और पढ़ी गई चीजों के आधार पर अलग-अलग प्रमुख हस्तियों पर अपने विचार साझा किए हैं। इसमें राजनीतिक और कारोबारी जगत की जानी-मानी हस्तियों के बारे में उनके अनुभव शामिल हैं। विजय माल्या पर लिखे अध्याय में उन्होंने कारोबारी की छवि और उनके साथ संसद में हुई मुलाकातों को आधार बनाया है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी पर लिखे अध्याय में उनके भाषणों का विश्लेषण किया है। किताब के ये दोनों हिस्से इसलिए चर्चा में हैं, क्योंकि एक ओर राउत ने माल्या के बचाव में अपनी राय रखी है, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री के गैर-राजनीतिक भाषणों की तारीफ की है। इस तरह बोध कीर्तन में राउत ने कुछ ऐसे विचार रखे हैं, जो उनके सामान्य राजनीतिक बयानों से अलग नजर आते हैं।

 

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