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Sandeshkhali Row: संदेशखाली में हो क्या रहा है? शाहजहां शेख पर क्या हैं आरोप, भाजपा-टीएमसी क्यों आमने-सामने?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 15 Feb 2024 05:39 PM IST

सार

Sandeshkhali Incident: पश्चिम बंगाल का संदेशखाली एक बार फिर चर्चा में है। यह वही इलाका है जहां ईडी टीम पर हमला हुआ था। उस वक्त ईडी की टीम टीएमसी नेता शाहजहां शेख के ठिकानों पर छापेमारी करने पहुंची थी। 
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संदेशखाली घटना - फोटो : Amar Ujala
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली को लेकर सियासत जारी है। भाजपा और टीएमसी दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। बंगाल के इस इलाके में एक ओर जहां महिलाएं टीएमसी नेता शाहजहां शेख और उसके समर्थकों के कथित अत्याचार के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं। दूसरी ओर राज्यपाल सीवी आनंद बोस की ओर से गृह मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट ने इसे और सुर्खियों में ला दिया है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में संदेशखाली पुलिस पर उपद्रवी तत्वों के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया गया है।

टीएमसी नेता शाहजहां शेख तब सुर्खियों में आए थे जब बीती पांच जनवरी को राशन घोटाले में उनकी भूमिका की जांच कर रही ईडी टीम पर हमला हुआ था। उस वक्त ईडी की टीम शाहजहां शेख के ठिकानों पर छापेमारी करने पहुंची थी। ईडी की टीम पर यह हमला संदेशखाली में ही हुआ था। शाहजहां शेख तब से ही फरार हैं। वहीं, इस घटना के बाद संदेशखाली की महिलाओं ने शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर कई आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। 


आखिर ये पूरा मामला क्या है? संदेशखाली की महिलाओं ने शाहजहां शेख पर क्या आरोप लगाए हैं? राज्यपाल की रिपोर्ट में क्या-क्या है? भाजपा और टीएमसी का इस मामले में क्या कहना है? शाहजहां शेख अभी कहां हैं? ईडी की टीम के साथ संदेशखाली में क्या हुआ था? ईडी जिस घोटाले में शाहजहां शेख को ढूंढ रही है वह क्या है? आइये समझते हैं.... 
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संदेशखाली घटना - फोटो : Amar Ujala
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली को लेकर सियासत जारी है। भाजपा और टीएमसी दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। बंगाल के इस इलाके में एक ओर जहां महिलाएं टीएमसी नेता शाहजहां शेख और उसके समर्थकों के कथित अत्याचार के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं। दूसरी ओर राज्यपाल सीवी आनंद बोस की ओर से गृह मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट ने इसे और सुर्खियों में ला दिया है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में संदेशखाली पुलिस पर उपद्रवी तत्वों के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया गया है।

टीएमसी नेता शाहजहां शेख तब सुर्खियों में आए थे जब बीती पांच जनवरी को राशन घोटाले में उनकी भूमिका की जांच कर रही ईडी टीम पर हमला हुआ था। उस वक्त ईडी की टीम शाहजहां शेख के ठिकानों पर छापेमारी करने पहुंची थी। ईडी की टीम पर यह हमला संदेशखाली में ही हुआ था। शाहजहां शेख तब से ही फरार हैं। वहीं, इस घटना के बाद संदेशखाली की महिलाओं ने शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर कई आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। 

आखिर ये पूरा मामला क्या है? संदेशखाली की महिलाओं ने शाहजहां शेख पर क्या आरोप लगाए हैं? राज्यपाल की रिपोर्ट में क्या-क्या है? भाजपा और टीएमसी का इस मामले में क्या कहना है? शाहजहां शेख अभी कहां हैं? ईडी की टीम के साथ संदेशखाली में क्या हुआ था? ईडी जिस घोटाले में शाहजहां शेख को ढूंढ रही है वह क्या है? आइये समझते हैं.... 

संदेशखाली में ईडी अधिकारियों पर हमला - फोटो : Social media
आखिर ये पूरा मामला क्या है?
पूरा मामला समझने से पहले थोड़ा पीछे जाना होगा। दरअसल, 5 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पश्चिम बंगाल के राशन घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहां शेख के आवासों पर छापेमारी करने गई थी। इस दौरान ईडी के अधिकारियों की गाड़ियों पर पत्थरबाजी की गई। आरोप टीएमसी नेता शाहजहां शेख के समर्थकों पर लगा। इसके बाद से शाहजहां शेख फरार हो गए और समन करने के बावजूद एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। 

अब ताजा बवाल को समझें तो संदेशखाली में 8 फरवरी से स्थानीय महिलाओं ने शाहजहां शेख और उनके समर्थकों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। इन महिलाओं ने शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर अत्याचार करने और जबरन जमीन कब्जाने जैसे कई आरोप लगाए।  9 फरवरी को तनाव तब बढ़ गया जब प्रदर्शनकारी महिलाओं ने शाहजहां समर्थक हाजरा के स्वामित्व वाले तीन पोल्ट्री फार्मों को जला दिया। महिलाओं का दावा था कि वे स्थानीय ग्रामीणों से जबरन छीनी गई जमीन पर बने थे।

महिलाओं के आरोप क्या हैं?
आरोप लगाने वाली स्थानीय महिलाओं में से एक महिला ने कहा, 'टीएमसी के लोग गांव में घर-घर जाकर सर्वे करते हैं। इस दौरान अगर घर में कोई सुंदर महिला, खासतौर पर लड़की या युवा पत्नी दिखती है तो वो लोग उसे पार्टी ऑफिस ले जाते हैं। जिस महिला को पार्टी ऑफिस ले जाया जाता है उसे कई रातों तक वहीं रखा जाता है।'

महिलाओं ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि शाहजहां की अनुपस्थिति ने उन्हें कई वर्षों से अपने ऊपर हो रहे अत्याचार के बारे में बोलने की हिम्मत दी है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने शाहजहां शेख से साथ ही टीएमसी की अन्य नेताओं उत्तम सरदार और शिबप्रसाद हाजरा पर भी इन सभी में शामिल होने के आरोप लगाए। ये दोनों नेता शाहजहां शेख के करीबी बताए जाते हैं।
 

संदेशखाली में प्रदर्शन - फोटो : ANI
महिलाओं के आरोप लगाने के बाद क्या हुआ?
इस बीच 10 फरवरी को पश्चिम बंगाल की राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने घटना को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'यह घटना सभ्य समाज में होने वाली सबसे बुरी घटना को दर्शाती है। सरकार को त्वरित और प्रभावी रूप से कार्रवाई करनी होगी।'

इसके बाद 12 फरवरी को राज्यपाल ने घटनास्थल का दौरा किया और महिलाओं से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया से कहा, 'जब मैंने माताओं और बहनों की बातें सुनी तो मुझे विश्वास नहीं हुआ कि रबिन्द्र नाथ टैगोर की धरती पर यह हो सकता है।'

इस बीच दो व्यक्तियों विकास सिंह (44) और उत्तम सरकार के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया गया और उनकी गिरफ्तारी हुई। हालांकि, 12 फरवरी को दोनों आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई। पुलिस का दावा है कि उसने आरोपियों की 10 दिन की पुलिस रिमांड मांगी थे लेकिन अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। उधर 13 फरवरी को महिला पुलिस की 10 कर्मियों ने संदेशखाली का दौरा किया। इस टीम का नेतृत्व आईपीएस सोमा दास मित्रा की अगुवाई कर रहीं थीं। 

13 फरवरी को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा रे ने घटना पर स्वत: संज्ञान लिया और राज्य को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। वहीं 14 फरवरी को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने संदेशखाली में जारी धारा 144 को रद्द कर दिया। 

14 फरवरी को बंगाल पुलिस ने संदेशखाली की कथित घटना को लेकर बयान जारी किया। पुलिस ने कहा, 'यह स्पष्ट किया जाता है कि अभी तक किसी भी महिला द्वारा दुष्कर्म के कोई आरोप नहीं मिले हैं।' डीआईजी सीआईडी के नेतृत्व में राज्य महिला आयोग द्वारा पूछताछ की गई। इस दौरान एक 10 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम और जिला पुलिस भी शामिल थी।

पुलिस ने दावा किया कि हाल ही में संदेशखाली के दौरे के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधियों ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें पूछताछ के दौरान स्थानीय महिलाओं के साथ दुष्कर्म की कोई शिकायत नहीं मिली। यह दोहराया जाता है कि प्राप्त सभी आरोपों और शिकायतों की विधिवत जांच की जाएगी और कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

संदेशखाली घटना - फोटो : ANI
तो भाजपा ने क्या आरोप लगाए हैं?
घटना की बीच बंगाल भाजपा ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया। बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांता मजूमदार की नेतृत्व में पार्टी ने इलाके में विरोध किया। 12 फरवरी को भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एक प्रेस वार्ता की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला और सरकार पर संदेशखाली हिंसा को लेकर गंभीर आरोप लगाया। 14 फरवरी को प्रदर्शन की दौरान ही भाजपा नेताओं और पुलिस की बीच झड़प हो गई जिसमें सुकांता मजूमदार घायल हो गए।

इसी दिन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संदेशखाली घटना के लिए पार्टी के उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इसे घटनास्थल पर जाकर तथ्यों की जानकारी एकत्रित कर अपनी रिपोर्ट जेपी नड्डा को सौंपने का काम दिया गया।

इस बीच बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संदेशखाली में महिलाओं का यौन उत्पीड़न हुआ है। साथ ही उनका कहना है कि संदेशखाली की घटना कलंकित करने वाली है। वहीं, पुलिस उपद्रवियों को बचा रही है। 

संदेशखाली घटना, राज्यपाल सीवी आनंद बोस - फोटो : ANI
अभी क्या हो रहा है?
गुरुवार (15 फरवरी) को पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस मुद्दे पर हंगामा हुआ। हंगामे के बीच भाजपा के विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा को संबोधित किया। ममता ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया है और न ही कभी होने देंगी।

ममता ने कहा कि संदेशखाली में राज्य महिला आयोग को भेजा, पुलिस दल बनाकर 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा, 'हम संदेशखाली में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, गलत काम में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।'

इधर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की टीम पश्चिम बंगाल के संदेशखाली क्षेत्र की समीक्षा करने पहुंची है। आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण हलदर और सदस्य अंजू बाला ने पीड़ितों से मुलाकात की। अरुण हलदर ने कहा कि संदेशखाली के लोग बहुत कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अबतक मौका नहीं मिला।

गुरुवार को ही टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की। इस दौरान टीम ने आरोप लगाया कि विपक्ष संदेशखाली घटना का राजनीतिकरण कर रहा है। 
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