नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के अन्य नेता इस मुद्दे पर मंगलवार को एक बैठक कर सकते हैं। सभी विपक्षी नेताओं की सहमति से संचार साथी एप पर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जाएगी। संसद में इस पर चर्चा कराने की मांग करने की भी योजना है। यदि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सहमत नहीं होती है तो संसद के बाहर और सड़क पर इसका विरोध किया जा सकता है।
इसके पहले जुलाई 2021 में राहुल गांधी सहित विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस्राइल से लाए गए एक स्पाई सॉफ्टवेयर 'पेगासस' से अपनी जासूसी होने का आरोप लगाया था। इस पर खूब हंगामा हुआ था। हालांकि, जब केंद्र सरकार ने जासूसी मामले की जांच करने के लिए राहुल गांधी को अपना मोबाइल सौंपने के लिए कहा गया था तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।
दावा है कि इस एप के जरिए अब तक 22.76 लाख फोन वापस हासिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा 37.28 लाख स्मार्ट फोन को चोरी या गायब होने पर ब्लॉक किया जा चुका है। लोग अनचाही कॉल्स के लिए भी संचार साथी से खूब शिकायत कर रहे हैं और उन्हें ब्लॉक कर अनजान कॉल से छुटकारा पा रहे हैं।
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संचार साथी से सरकार किसी की जासूसी नहीं कर सकती। संचार साथी लोगों की निजी डेटा नहीं पढ़ सकती, वह स्मार्ट फोन में फोन कॉल या संदेश भी नहीं पढ़ सकती। उन्होंने कहा कि संचार साथी से केवल फर्जी कॉल, स्पैम कॉल को रोकने का काम करती है। कोई संदेहास्पद कॉल आने पर या फ्रॉड संदेश आने पर संचार साथी इसके प्रति लोगों को सावधान करता है।
पात्रा ने कहा है कि संचार साथी मोबाइल फोन से किसी फोन की IMEI की असलियत बताने का काम किया जाता है। इससे फर्जी आईएमईआई को पकड़ा जा सकता है जिससे लोगों को किसी फ्रॉड से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि संचार साथी से 1.75 करोड़ फर्जी कनेक्शन को बंद किया गया है। इसे कभी भी डिलीट किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का संचार साथी को लेकर दिया गया बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी पक्षों के हितों की रक्षा करने के लिए सबसे बातचीत करके निर्णय लिया जाता है। लोगों के हितों के लिए कोई भी कदम उठाए जाने पर विपक्ष लोगों के मन में संदेह पैदा करने वाला काम करता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने भी पेगासस से जासूसी होने की बात कही थी, लेकिन वे इसकी जांच के लिए सामने नहीं आए थे।