फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SKM: देश के सभी जिलों और राज्यों की राजधानियों में पक्के मोर्चे बनाएगा संयुक्त किसान मोर्चा, जानें क्या है वजह

Fri, 24 Jan 2025 08:28 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सभी फसलों के लिए C2+50% फॉर्मूले पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। सभी किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए कर्ज माफी योजना लागू हो। सरकार, 9 दिसंबर 2021 की लंबित मांगों को पूरा करें।
विज्ञापन
संयुक्त किसान मोर्चा का बड़ा एलान - फोटो : ANI / अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की महासभा ने सर्वसम्मति से 'नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग' (एनपीएफएएम) को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। महासभा ने एनपीएफएएम को तीन काले कृषि कानूनों का नया संस्करण बताया है। एसकेएम, इसे रद्द कराने के लिए पूरी ताकत से लड़ेगा। यदि सरकार इसे वापस नहीं लेती है तो सांसद कार्यालयों के सामने धरना दिया जाएगा। 'ग्रामीण भारत हड़ताल' का आह्वान होगा। इतना ही नहीं, अगर सरकार ने किसानों की मांगें नहीं मानी तो देश के सभी जिलों और राज्यों की राजधानियों में पक्के मोर्चे स्थापित किए जाएंगे। 
विज्ञापन


'C2+50% फॉर्मूले पर मिले एमएसपी की कानूनी गारंटी'
एसकेएम ने कहा है कि सभी फसलों के लिए C2+50% फॉर्मूले पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। सभी किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए कर्ज माफी योजना लागू हो। सरकार, 9 दिसंबर 2021 की लंबित मांगों को पूरा करे। अगर ये मांगें पूरी नहीं होती हैं तो एसकेएम राज्यों में जिला स्तर और सभी प्रदेशों की राजधानियों में पक्के मोर्चे स्थापित करेगा। विधानसभाओं से एनपीएफएएम को खारिज करने के प्रस्ताव पारित करने की मांग करेगा। ये सभी निर्णय शुक्रवार को एचएस सुरजीत भवन में आयोजित एसकेएम महासभा की बैठक में लिए गए हैं। इस बैठक में 12 राज्यों के 73 किसान संगठनों के 165 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति फ्रेमवर्क को तीन काले कृषि कानूनों का नया संस्करण मानते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया गया।

संयुक्त किसान मोर्चा ने लगाए कई आरोप
महासभा ने कहा, सरकार इसे राज्य सरकारों के माध्यम से पिछले दरवाजे से थोपने की कोशिश कर रही है। बैठक में किसान नेताओं ने एक स्वर में इस नीति को सरकारी मंडियों पर सीधा हमला बताते हुए कहा, सरकार मंडियों का निजीकरण करके बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉरपोरेट्स को लाभ पहुंचाने की साजिश रच रही है। यह नीति स्थानीय ग्रामीण मंडियों को एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन), ई-नाम और ठेका खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) के माध्यम से कृषि प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए सस्ते कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की चाल है। यह सब डब्ल्यूटीओ और विश्व बैंक की सिफारिशों के अनुरूप किया जा रहा है। 
विज्ञापन


'NPFAM खाद्यान्न भंडारण का कोई प्रावधान नहीं'
एनपीएफएएम में एमएसपी की घोषणा, सरकारी खरीद और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए खाद्यान्न भंडारण का कोई प्रावधान नहीं है। यह केवल बफर स्टॉक तक सीमित है, जो किसानों के हितों के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र है। एसकेएम ने घोषणा की है कि इस बाबत महापंचायतों से संपर्क किया जाएगा। देश में कई जगहों पर सम्मेलन आयोजित होंगे। इस नीति के खिलाफ देशभर में जनजागरण किया जाएगा। विरोध प्रदर्शन की कड़ी में 10 फरवरी को सांसदों के कार्यालयों के सामने विरोध धरने का आह्वान किया गया है। इसका मकसद, सांसदों को इस नीति के दुष्प्रभावों से अवगत कराना है। एसकेएम ने अन्य जन आंदोलनों के साथ मिलकर संयुक्त संघर्ष करने का संकल्प दोहराया है। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र सरकार झुकी नहीं, तो एसकेएम 'ग्रामीण भारत हड़ताल' का आह्वान करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें