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Samwad 2025: 'औरंगजेब की कब्र को तो मैं बचा रहा हूं...', संवाद में बोले मनोज मुंतशिर, उर्दू को लेकर कही ये बात

Fri, 18 Apr 2025 06:23 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमर उजाला संवाद 2025 के मंच पर मनोज मुंतशिर ने अपने करियर, लेखन, कविता, शेर-ओ-शायरी, फिल्मों के डायलॉग और शोहरत की बुलंदियों को छूने के बाद के जीवन जैसे पहलुओं पर विस्तार से बात की।
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संवाद के मंच पर मनोज मुंतशिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बॉलीवुड के जानमाने गीतकार और कवि मनोज मुंतशिर अमर उजाला संवाद के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने राम, आदिपुरुष समेत कई मुद्दों पर अपनी बेवाक राय रखी।  इस दौरान उन्होंने पूर्व में औरंगजेब पर दिए गए अपने पुराने बयान पर बात की। जब मनोज मुंतशिर से ये पूछा गया कि, औरंगजेब की कब्र पर टॉयलेट बनवाने की बातें हो रही हैं, इस तरह के बयान सही हैं?

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'औरंगजेब की कब्र को तोड़ने की जरूरत क्या है? वहां शौचालय बनवा दो'
इस पर मनोज मुंतशिर ने कहा कि एक कवि को कवि की तरह सुनिए। मैं समाचार वाचक या राजनेता या किसी पार्टी का प्रवक्ता नहीं हूं। जब मैं कोई बात कहूं तो थोड़ा मर्म भी जोड़ना चाहिए। जब श्रीराम जन्मभूमि के लिए अदालत में लड़ाई लड़ी जा रही थी, तब हमने सारा समर्पण इस बात को सिद्ध करने में लगा दिया था कि रामलला यहीं पैदा हुए थे। तब कुछ खास वर्ग से बयान आते थे कि वहां तो अस्पताल, स्कूल खुलवा दें, मंदिर की क्या जरूरत है। जहां 'ठुमक चलत रामचंद्र' थे, वहीं क्यों अस्पताल बनवाना है? ऐसे तर्क लोगों को गुमराह करते हैं। इसे 'लिबरल थॉट' मान लिया जाता है, लेकिन मंदिर वहां चाहिए था। 

उन्होंने कहा कि औरंगजेब की कब्र को तो मैं बचा रहा हूं। मैंने लोगों को उन्हीं के अंदाज में जवाब दिया कि औरंगजेब की कब्र को तोड़ने की जरूरत क्या है? वहां शौचालय बनवा दो, स्वच्छ भारत मिशन पूरा हो जाएगा।

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'उर्दू को पाकिस्तान की भाषा बताने पर मुझे शर्मिंदगी होती है'

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मनोज मुंतशिर से जब पूछा गया कि सोशल मीडिया पर क्या नफरत का बाजार नहीं चल रहा? उर्दू को पाकिस्तान की भाषा बता देते हैं। इस पर  मनोज मुंतशिर ने कहा, उर्दू को पाकिस्तान की भाषा बताने पर मुझे शर्मिंदगी होती है। पाकिस्तान उर्दू पर अपना हक जमाए, लेकिन वह तो कश्मीर पर भी हक जमाता है। क्या कश्मीर पर उनका हक मान लेते हैं? अगर नहीं तो उर्दू पर पाकिस्तान के हक को क्यों मान लेते हैं? तीन लाइनें उर्दू का शब्द शामिल किए बिना क्या बोली जा सकती हैं?
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