फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

DRDO: देश के रक्षा आत्मनिर्भरता को डीआरडीओ ने दी नई रफ्तार, 1.30 लाख करोड़ के स्वदेशी हथियारों को मिली मंजूरी

Fri, 02 Jan 2026 02:06 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Defence Research And Development Organisation: डीआरडीओ प्रमुख समीर वी कामत ने कहा कि स्वदेशी रक्षा तकनीक ने भारत की आत्मनिर्भरता को नया आयाम दिया है। 2025 में 1.30 लाख करोड़ रुपये के हथियारों को मंजूरी मिली।

विज्ञापन
डीआरडीओ प्रमुख समीर कामत - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने कहा कि संगठन के प्रयासों से देश की रक्षा तैयारियों में क्वांटम जंप आया है और यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत विजन को मजबूती देता है।

विज्ञापन


डीआरडीओ की 68वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कामत ने बताया कि वर्ष 2025 में सरकार ने डीआरडीओ द्वारा विकसित रक्षा प्रणालियों के लिए 22 ‘स्वीकृति-आवश्यकता’ (AoN) को मंजूरी दी है। इन प्रणालियों की अनुमानित लागत करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये है और इनका निर्माण पूरी तरह भारतीय उद्योगों द्वारा किया जाएगा। यह किसी एक वर्ष में दी गई अब तक की सबसे बड़ी मंजूरी मानी जा रही है।

इन अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों को मिली मंजूरी
जिन प्रमुख रक्षा प्रणालियों को 'स्वीकृति आवश्यकता' दी गई है, उनमें इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम, कन्वेंशनल बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम, अनंत शास्त्र क्विक रिएक्शन मिसाइल, अस्त्र Mk-II, लॉन्ग रेंज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम MK-II और नाग मिसाइल Mk-2 शामिल हैं। इसके अलावा अश्विनी रडार, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट सिम्युलेटर, पिनाका रॉकेट सिस्टम, एडवांस्ड टॉरपीडो और माउंटेन रडार जैसी प्रणालियों को भी मंजूरी मिली है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- बल्लारी में बैनर विवाद पर बवाल, भाजपा और कांग्रेस नेता के समर्थक भिड़े; फायरिंग और पथराव से तनाव

26 हजार करोड़ के रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर
समीर कामत ने बताया कि वर्ष 2025 में डीआरडीओ ने अपने उत्पादन साझेदारों के साथ 26,000 करोड़ रुपये के 11 रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें नाग मिसाइल, एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, पिनाका के लिए गोला-बारूद और एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम शामिल हैं। डीआरडीओ प्रमुख ने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ की आरएंडडी क्षमताएं देश के रक्षा उद्योग के लिए उत्प्रेरक साबित हो रही हैं।
विज्ञापन


स्वदेशी तकनीक से उद्योगों को बढ़ावा
अब तक डीआरडीओ ने भारतीय उद्योगों को 2,201 तकनीकी हस्तांतरण लाइसेंस दिए हैं, जिनमें से 245 लाइसेंस अकेले 2025 में जारी किए गए। इसके साथ ही डीआरडीओ की परीक्षण सुविधाएं निजी उद्योगों के लिए भी खोली गई हैं, जहां 2025 में 4,000 से अधिक परीक्षण किए गए। डीआरडीओ द्वारा विकसित कई प्रणालियां सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, पुलिस और आपदा प्रबंधन बलों में शामिल की जा चुकी हैं। इससे भारत की रक्षा क्षमता और रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है।

अन्य वीडियो:-

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें