अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर
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चिट्ठी पर ओमप्रकाश राजभर का क्या कहना है?
SP की चिट्ठी सामने आते ही ओमप्रकाश राजभर का बयान आया। राजभर ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान जब पहले चरण के टिकट बंटे तभी मैंंने अखिलेश यादव से कहा कि अति पिछड़ों को टिकट दीजिए। उस वक्त अखिलेश ने कहा दूसरे चरण में देंगे। दूसरे चरण में भी ऐसा नहीं किया गया। तभी मैंने कह दिया था SP गठबंधन चुनाव नहीं जीत सकता। क्योंकि जब अति पिछड़ों को टिकट नहीं मिलेगा तो वो आपको वोट क्यों देंगे। वहीं, ओमप्रकाश राजभर के बेटे ने लिखा, ‘खुदकुशी करती है आपस की सियासत कैसे, हमने ये फिल्म नई खूब इधर देखी है, धन्यवाद है समाजवादी पार्टी, अखिलेश यादव जी को... फिर मिलेंगे चलते-चलते।’
क्या अब राजभर अब किसके साथ जा सकते हैं?
SP की चिट्ठी आते ही राजभर ने कहा की वह BSP के साथ जाएंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या आपकी मायावती से बात हो गई है तो उन्होंने कहा कि बसपा के नेताओं के साथ बातचीत जारी है। जल्द मायावती से भी बात हो जाएगी। वहीं, जब उनसे भाजपा के साथ बढ़ती नजदीकियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा पहले BSP से बात हो जाने दीजिए। हालांकि, उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की।
राजभर भले BSP के साथ जाने की बात कर रहे हैं। इसके बावजूद कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि राजभर भले BSP के साथ जाने की बात कर रहे हैं, लेकिन उनका फैसला क्या होगा ये कहना जल्दबाजी होगी। बीते दिनों में उनकी करीबी भाजपा के साथ ज्यादा देखी गई है। राष्ट्रपति चुनाव में भी राजभर की पार्टी ने BJP उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया था।
मतदान करने के बाद शिवपाल सिंह यादव।
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शिवपाल यादव ने क्या कहा है?
सपा की ओर से चिट्ठी जारी होने के बाद शिवपाल यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि शिवपाल के पास दो रास्ते हैं। पहला वो सपा विधायक रहते हुए अखिलेश पर हमले करते रहें। दूसरा 2017 की तरह सपा का विधायक होते हुए भी अपनी पार्टी को सपा के खिलाफ मजबूत करने का एलान कर दें।
तो क्या सपा गठबंधन पूरी तरह बिखर जाएगा?
चुनाव नतीजे आने के बाद अखिलेश यादव के ज्यादातर सहयोगी उनका साथ छोड़ चुके हैं। सबसे पहले महान दल के केशव देव मौर्य गठबंधन से अलग हुए। उनके बाद संजय चौहान ने भी अपना रास्ता अलग कर लिया। अब ओम प्रकाश राजभर भी अलग रास्ते जा सकते हैं। ऐसे में अखिलेश के गठबंधन में अब जयंत चौधरी की पार्टी रालोद ही रह जाएगी।
एक साथ मंच पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर।
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अखिलेश यादव और जयंत चौधरी।
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