आईटी के क्षेत्र में बड़ी कंपनी INFOSYS ने नये सीईओ और एमडी के रूप में सलिल एस पारेख के नाम पर मुहर लगा दी है। पारेख 2 जनवरी से जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान में पारेख फ्रेंच आईटी सर्विस कंपनी CAPGEMINI में एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य हैं।
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उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस और मेकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है। पारेख ने IIT बांबे से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री हासिल की है। आपको बता दें कि नंदन नीलकणि नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर काम करते रहेंगे।
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वहीं इंफोसिस के आंतरिक सीईओ प्रवीन राव कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग सीईओ होंगे। नारायण मूर्ति से झगड़े की वजह से विशाल सिक्का ने एमडी और सीईओ पद से 18 अगस्त को रिजाइन कर दिया था जिसके बाद से ही नई संभावनाओं पर काम चल रहा था।
कौन हैं पारेख
सलिल एस. पारेख फ्रांसीसी आईटी सर्विसेज कंपनी कैपजेमिनी समूह के एक्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य हैं। वर्ष 2000 में अर्नेस्ट एंड यंग के कंसलटिंग डिवीजन के अधिग्रहण के बाद उन्होंने कैपजेमिनी ज्वाइन की थी। पारेख ने कॉरनेल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की है। आईआईटी बॉम्बे से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीटेक हैं।
ये भी थे होड़ में
इंफोसिस के लिए संभावित सीईओ की तलाश के बीच बाहरी उम्मीदवारों के साथ ही कंपनी के अंतरिम सीईओ प्रवीण राव, सीएफओ रंगनाथ डी मविनकेरे, डिप्टी सीओओ रवि कुमार एस और बैंकिंग, फाइनेंशियल और इंश्योरेंस सर्विसेज तथा हेल्थकेयर वर्टिकल के हेड मोहित जोशी के नाम पर चले रहे थे।
विवादों के चलते सिक्का ने दिया था इस्तीफा
कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का ने इस साल अगस्त में कंपनी के संस्थापक नारायण मूर्ति से मतभेदों के चलते इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि दुर्भावनापूर्ण निजी हमलों के बीच काम नहीं कर सकते हैं। मूर्ति ने सिक्का के नेतृत्व में हुई पनाया डील को लेकर सवाल उठाए थे।
नीलेकणि की हुई थी वापसी
सिक्का के इस्तीफा देने के बाद कंपनी के एक और संस्थापक तथा आधार परियोजना के प्रमुख रहे नंदन नीलेकणि बतौर गैर कार्यकारी चेयरमैन वापस लौटे थे।
शानदार रिकॉर्ड : नीलेकणि
कंपनी के निदेशक मंडल के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने कहा कि पारेख के पास सूचना प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र में लगभग तीन दशक काम करने का अनुभव है। कई कारोबारों को बनाने और कई अधिग्रहण को सफलतापूर्वक प्रबंध करने का उनका शानदार रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि निदेशक मंडल का मानना है कि ऐसे परिवर्तनकारी समय में इंफोसिस का नेतृत्व करने के लिए पारेख एकदम उचित व्यक्तिहैं।
दूसरी बार बाहर से सीईओ
यह दूसरा मौका है जब इंफोसिस का सीईओ कंपनी से बाहर के किसी व्यक्ति को बनाया गया है। इससे पहले 2014 में विशाल सिक्का एसएपी से लाकर सीईओ बनाया गया था। वह कंपनी के गैर संस्थापक सीईओ थे।
पारेख के सामने चुनौतियां
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि पारेख को नई भूमिका में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसमें संस्थापकों और प्रबंधन बोर्ड के बीच शांति बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। साथ ही उनका प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें फैसले लेने में कितनी आजादी मिलती है।