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रेलवे की मांग पूरी करने में सेल ने खड़े किए हाथ, कोयले की कमी का दिया हवाला

Wed, 25 Oct 2017 02:34 PM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली
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indian railway
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देश की अर्थवस्था को उभार देने के लिए केंद्र सरकार बेशक कई तरह के कवायदों में जुटी हुई है। मगर बुनियादी मामलों में सरकार के अपने ही उपक्रमों की हालत जस की तस बनी हुई है। भारत सरकार की नवरत्न कही जाने वाली कंपनियों की स्थिति ऐसी है कि निजी क्षेत्र को चुनौती देना तो दूर वे सरकार की अपनी संस्थाओं के मांग की ही आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रही हैं।  
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स्टील अथारटी ऑफ इंडिया (सेल) ने रेलवे की मांग को पूरा करने असमर्थता जता दी है। सूत्र बताते हैं कि अपनी बुनियादी जरूरतों को सुधारने के कवायद में रेलवे ने सेल को 16 लाख टन लोहे का ऑडर दिया है। जिसमें रेलवे को अगले 1 वर्ष में 12 लाख टन लोहे की सप्लाई सेल को सुनिश्चित करनी है।

मगर सेल ने इतने बड़े मांग को पूरा करने में अपनी असमर्थता जताई है। सेल अधिकारियों ने स्टील मंत्री चौ.बीरेंद्र सिंह को अवगत कराया है कि वे रेलवे को 9.5 लाख टन से ज्यादा की सप्लाई नहीं कर सकते हैं। इसपर मंत्री महोदय ने सेल के शीर्ष अधिकारियों और उसके पांचो प्लांट प्रमुखों को कड़ी फटकार लगाई है।
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मंत्री की फटकार के बाद सेल ने कोयले की कमी का रोना रोया है। देश में कोयले की कमी का आलम तब है जब उद्योगों के नाम पर देश के तमाम कोल खदानों की निलामी की जा चुकी है। 

रेलवे ने सरकार से मांगी लोहा आयात करने की अनुमति 

पीएम नरेंद्र मोदी
देश को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद में एकतरफ पीएम मोदी ने मेक इन इंडिय़ा अभियान चलाया हुआ है। तो दूसरी तरफ सरकार की अपनी ही नवरत्न कंपनी सेल के निकम्मेपन की वजह से रेलवे ने लोहे के आयात के लिए विदेश और वाणिज्य मंत्रालय के समक्ष अनुमति की गुहार लगाई है।

रेलवे के गुहार पर विदेश मंत्रालय ने सरकार के स्टील मंत्रालय से पूछा है कि रेलवे को लोहा आयात करने की नौबत क्यों पड़ रही है। विदेश मंत्रालय का खत आने के बाद ही सोमवार को केंद्रीय स्टील मंत्री ने सेल के शीर्ष अधिकारियों के संग करीब चार घंटे की मैराथन बैठक की।

इस बैठक में केंद्रीय स्टील सचिव, विभाग के दोनों मंत्री बीरेंद्र सिंह और विष्णुदेव साय, सेल चेयरमैन, सेल के निदेशक और सेल के पांचों प्लांटों के सीईओ उपस्थित थे। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने सेल अधिकारियों और प्लांट के प्रमुखों को फटकार लगाते हुए समय पर उत्पादन सुनिश्चित करने की बात कही। 

सेल ने रोया कोयले की कमी का रोना 

रेलवे की मांग को पूरा न कर पाने के वजह को लेकर मंत्री की फटकार के बाद सेल अधिकारियों ने कोयले की कमी का रोना रोया है। उनका कहना है कि कोयले की कमी के वजह से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सेल अधिकारियों की दलील है कि सेल के प्लांट दिशा निर्देश के तहत स्टील प्लांट के पास 7 दिनों का कोयला प्लांट के गोदाम में मौजूद रहना चाहिए। लेकिन कोयले की कमी के वजह से यह स्थिति नहीं है।

आलम यह है कि रेलवे को लोहा उपलब्ध कराने वाले भीलाई स्टील प्लांट के पास एक से डेढ़ दिन का ही कोयला रिजर्व है। तो अन्य प्लांटों की स्थिति भी कमोबेस ऐसी ही है। उनके पास दो से तीन दिन का कोयला रिजर्व है। 
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सेल को क्यों हो रही है कोयले की किल्लत

coal
मंत्रालय सूत्रों की मानें तो सेल को अपने उपयोग के लिए कोयले के आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। सेल के उपयोग का 85 प्रतिशत कोयला विदेशों से आयात होता है। मुख्य रूप से यूएसए और आस्ट्रेलिया से सेल कोयले का आयात करता है।

इसमें से भी आयातित कोयले की 85 प्रतिशत खेप अकेले आस्ट्रेलिया से आयात होता है। सेल अधिकारियों की दलील है कि आस्ट्रेलिया में समय-समय पर होने वाले प्राकृतिक आपदाओं की वजह से आयात का कोयला समय पर सुनिश्चित नहीं हो पाता है। इसलिए भी कोयले की तंगी झेलनी पड़ रही है। 

मोजाम्बिक के खदान में जल्द शुरू होगा कार्य

कोयले की आपूर्ति सुनिश्चत करने के लिए सेल ने सरकार के अन्य उपक्रमों एनएमडीसी और आरआईएनएल के साथ मिलकर साझे उपक्रम के रूप में मोजाम्बिक में कोयले की खदान ली हुई है। लेकिन पिछले डेढ़-दो वर्षों से मोजाम्बिक की खदान से कोयला निकालने का कार्य ठप्प है। वहां से कोयला निकासी के लिए सरकार ने करीब दो बार टेंडर जारी किए। मगर अब तक उसमें किसी ने दिलचश्पी नहीं दिखाई है। सेल अधिकारियों के आग्रह पर विभाग के मंत्रियों ने मोजाम्बिक की खदान से कोयले का निकासी के कार्य को जल्द सुलटाने का निर्देश स्टील मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को दिया है। 
 
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