कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार के धार्मिक प्रतीकों से जुड़े आदेश के तहत शिक्षण संस्थानों में भगवा शॉल की अनुमति नहीं होगी, जबकि पहले से चली आ रही परंपराएं जैसे हिजाब, पगड़ी, रुद्राक्ष और जनेऊ की अनुमति जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि जो धार्मिक परिधान पहले से प्रचलन में हैं, उन्हें अनुमति दी जाएगी।
राज्य सरकार ने बुधवार को आदेश जारी कर हिजाब, जनेऊ, शिवधार और रुद्राक्ष जैसे धार्मिक प्रतीकों के उपयोग की अनुमति दी थी और 2022 में भाजपा सरकार की ओर लगाया गया हिजाब प्रतिबंध आदेश वापस ले लिया था।
विपक्ष ने की आलोचना
विपक्ष ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे 'तुष्टिकरण की राजनीति' बताया था। कुछ हिंदू संगठनों ने स्कूलों में भगवा शॉल पहनने की धमकी भी दी थी। अब मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि भगवा शॉल की अनुमति नहीं होगी।
मुख्यमंत्रीने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, भगवा शॉल की अनुमति नहीं है। ऐसे शॉल नहीं पहने जा सकते। पगड़ी, जनेऊ, शिवधार, रुद्राक्ष और हिजाब पहना जा सकता है। उन्होंने कहा, यह सिर्फ हिजाब की बात नहीं है। लोग अपने विश्वास के अनुसार जनेऊ, शिवधार, रुद्राक्ष आदि भी पहन सकते हैं। यह कक्षा 12 तक लागू रहेगा, चाहे स्कूल हो, कॉलेज हो या प्राथमिक स्कूल।
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नई परंपरा शुरू नहीं की जा सकती: सिद्धारमैया
जब उनसे पूछा गया कि क्या भगवा पहचान दिखाने वाली पगड़ियों की अनुमति होगी, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल वही परंपराएं मान्य होंगी जो पहले से मौजूद हैं, नई परंपराएं शुरू नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा, जब हम पगड़ी की बात करते हैं, तो इसका मतलब वही परंपराएं हैं जो पहले से चल रही हैं। कोई नई परंपरा शुरू नहीं की जा सकती।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले का आकार छोटा होने और डीजल बचाने की उनकी अपील पर सिद्धारमैया ने कहा कि ऐसे कदमों का असर सिर्फ अस्थायी होगा और इसके बजाय अन्य देशों के साथ मिलकर जागरूकता फैलानी चाहिए। नीट परीक्षा विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने परीक्षा प्रणाली की आलोचना की और कहा कि छात्रों को प्रशासन की खामियों की वजह से नुकसान नहीं होना चाहिए।
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