सचिन काटे की कामयाबी युवाओं के लिए मिसाल
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हिंदी साहित्य के महान कवि, कथाकार और गजलकार दुष्यंत कुमार जी की एक पंक्ति काफी मशहूर है कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों...। इसका मतलब है कि दुनिया का कोई भी काम असंभव नहीं है, बस जरूरत होती है पूरे जोश और मजबूत इरादों के साथ उसे करने की। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है क्लियर कार रेंटल सर्विस के मालिक सचिन काटे ने। उनकी कहानी इस बात का नायाब उदाहरण है कि संघर्ष तो हरेक इन्सान के जीवन में आता है, लेकिन जिनके हौसले बुलंद होते हैं वही उन पर विजय भी हासिल कर पाते हैं। सचिन एक ऐसी जगह से आते हैं, जहां के लोगों का स्टार्टअप शब्द से कोई सरोकार नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने न सिर्फ खुद का स्टार्टअप शुरू किया, बल्कि उसे लगभग दो सौ करोड़ रुपये की कंपनी बनाकर एक मिसाल कायम की। सचिन की सफलता की यात्रा में बाधाएं तो तमाम आईं, लेकिन वह उससे हताश होने के बजाय उसे अपनी तरक्की के लिए सीढ़ी बनाते गए। उन्होंने समाज की रूढ़िवादी सोच से परे जाकर एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिससे हर युवा को कुछ कर गुजरने की सीख मिलती है।
छोटी उम्र, बड़े सपने
सचिन काटे का जन्म महाराष्ट्र के औरंगाबाद के एक छोटे-से गांव के गरीब किसान परिवार में हुआ था। परिवार आर्थिक तंगी से तो गुजर ही रहा था, सामाजिक और शैक्षणिक चुनौतियां भी कम न थीं। गांव से ही चौथी तक पढ़ाई करने के बाद उनके पिता ने उन्हें आगे की पढ़ाई करने के लिए अपने दोस्त के घर भेज दिया। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती जो थी, वह थी शहर में गुजर-बसर करने की। इसके लिए उन्होंने अखबार बेचने का काम शुरू किया। वह सुबह घर-घर जाकर अखबार बांटते, इसके बाद स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई करते। सचिन की उम्र भले ही छोटी थी, लेकिन सपने बड़े थे। उसे पूरा करने के लिए वह किसी भी हद तक मेहनत करने को तैयार थे।
पार्ट टाइम सैलरी फुल टाइम नौकरी
चुनौतियों से लड़ते हुए सचिन ने दसवीं कक्षा पास कर ली और जैसे-तैसे ग्यारहवीं में दाखिला भी ले लिया। जैसे-जैसे पढ़ाई का स्तर बढ़ रहा था, खर्चे भी बढ़ने लगे थे। इसी बीच उन्हें एक कंप्यूटर संस्थान में बतौर ऑफिस बॉय की नौकरी मिल गई। इससे पैसों की समस्या कुछ हद तक कम हो गई। यहां काम करते हुए सचिन ने कंप्यूटर से जुड़ी बारीकियों को सीखने का एक भी मौका नहीं छोड़ा। इसका परिणाम यह हुआ कि बारहवीं की पढ़ाई के साथ ही उन्होंने एक वेब डेवलपमेंट कंपनी में पार्ट टाइम नौकरी कर ली। उन्हें सैलरी पार्ट टाइम की मिलती थी, लेकिन काम वह फुल टाइम वाला करते थे, क्योंकि उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिल रहा था। साथ ही साथ उन्होंने यात्रा और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में भी विशेषज्ञता हासिल की। बारहवीं के बाद स्नातक करने के लिए उन्होंने एक ट्रैवल एजेंसी में बतौर ट्रेवल एजेंट नौकरी कर ली।
चार लोगों के साथ की शुरुआत
ट्रैवल एजेंसी के साथ काम करते हुए, वह व्यवसाय करने के तरीकों और रणनीतियों को बखूबी जान चुके थे। इसी दौरान उनके दिमाग में खुद का व्यवसाय शुरू करने का ख्याल आया। इसे अमली जामा उन्होंने साल 2011 में पहनाया, जब उन्होंने चार सदस्यों की एक टीम के साथ क्लियर कार रेंटल प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। समय बीतने के साथ ही कंपनी भी बढ़ने लगी। चार सदस्यों की एक टीम के साथ शुरू हुई क्लियर कार रेंटल सर्विस कंपनी आज लगभग 14,000 कैब के साथ भारत के 240 से भी अधिक शहरों में अपनी सेवाएं दे रही है। सचिन काटे की मेहनत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह न तो कोई छुट्टी लेते हैं और न ही उनके काम करने के घंटों का कोई लेखा-जोखा है। उनकी कंपनी का टर्नओवर लगभग दो सौ करोड़ रुपये का है, जो इसे भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले स्टार्टअप में से एक बनाता है। अभी भी उनका लक्ष्य उत्पादों, सेवाओं और प्रौद्योगिकी का विकास और उसे इस तरह से लॉन्च करने की योजना है, जो कार रेंटल उद्योग में क्रांतिकारी साबित हो।
युवाओं को सीख
- समस्याओं के समाधान खोजने वाला इन्सान ही एक दिन सफलता प्राप्त करता है।
- अगर आपको खुद पर विश्वास है, तो यकीन मानिए आप हर चुनौती को पार कर सकते हैं।
- कुछ कर गुजरने की जिद रखने वाले लोग ही दूसरों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनते हैं।
- धैर्य के साथ निर्णय लेने वाले ही सफलता के सिंहासन पर बैठते हैं।
- चरित्र का निर्माण करते हुए जीवन में किया गया संघर्ष ही तय करता है कि भविष्य कैसा होगा।