सबरीमाला मामले में दायर समीक्षा याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आगामी 13 जनवरी को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संवैधानिक पीठ द्वारा याचिकाओं की सुनवाई की जाएगी।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर मामले की सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता में नौ न्यायाधीशों की पीठ गठित की ।
जिसमें प्रधान न्यायाधीश के अलावा पीठ में न्यायाधीश आर भानुमति, अशोक भूषण, एलएन राव, एमएम शांतागौडर, एसए नजीर, आरएस रेड्डी, बीआर गवई और सूर्यकांत शामिल हैं।
बता दें कि सबरीमाला मंदिर पर जारी विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा याचिकाओं पर दिसंबर 2019 में सात न्यायाधीशों की एक बड़ी बेंच गठित की गई थी।
सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति संबंधी फैसले को चुनौती देने वाली समीक्षा याचिका दायर की गई हैं।
गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने पूर्व के फैसले में सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश का अधिकार दे दिया था। हालांकि इस फैसले की समीक्षा के लिए 60 याचिकाएं दायर की गईं थीं। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालिन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों वाली पीठ ने छह फरवरी 2019 को इन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इससे पहले सबरीमाला मंदिर मामले पर 13 दिसंबर को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई थी। अदालत ने कहा था कि पुनर्विचार याचिका पर वह जल्द से जल्द एक बड़ी संवैधानिक पीठ का गठन करेंगे। जो मामले से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। अदालत ने दो महिलाओं- बिंदू अम्मिनी और रेहना फातिमा को अगली सुनवाई तक के लिए पुलिस सुरक्षा प्रदान की है।
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा था, 'सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को जाने की इजाजत वाला आदेश दिया गया है, लेकिन यह भी सच है कि मामले को बड़ी पीठ को रेफर किया गया है। हम किसी भी तरह की हिंसा को नहीं चाहते हैं।'