सबरीमाला मंदिर में मंडला पूजा से पहले भगवान अयप्पा के पवित्र सुनहरे वस्त्र 'थंका अंकी' की शोभायात्रा अरनमुला से शुरू हो गई है। 453 सॉवरेन वजनी यह स्वर्ण वस्त्र 26 दिसंबर को सन्निधानम पहुंचेगा। 27 दिसंबर को मंडला पूजा के दौरान भगवान अयप्पा को थंका अंकी अर्पित की जाएगी।
सबरीमाला मंदिर में होने वाली शुभ 'मंडला पूजा' की तैयारियों के बीच, भगवान अयप्पा को पहनाए जाने वाले पवित्र 'थंका अंकी' (सुनहरे वस्त्र) की शोभायात्रा मंगलवार को अरनमुला पार्थसारथी मंदिर से शुरू हुई। इस शोभायात्रा में पवित्र 'थंका अंकी' को एक विशेष रूप से सजे-धजे रथ में ले जाया जा रहा है। इस यात्रा में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हैं।
जैसे-जैसे यह शोभायात्रा अपने पारंपरिक मार्ग से आगे बढ़ रही है, रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालु भगवान अयप्पा के इन सुनहरे वस्त्रों के दर्शन और प्रार्थना करने के लिए उमड़ रहे हैं। सबरीमाला पहुंचने से पहले, रास्ते में पड़ने वाले कई मंदिरों में इस शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। इस पूरी यात्रा के लिए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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बता दें कि लगभग 453 सॉवरेन वजन वाला यह 'थंका अंकी' 1970 के दशक में त्रावणकोर शाही परिवार ने भगवान अयप्पा को उपहार के तौर पर दान दिया था। इसको लेकर टीडीबी के अधिकारियों ने बताया कि शोभायात्रा 26 दिसंबर को शाम की दीपाराधना से पहले सन्निधानम (मंदिर परिसर) पहुंचेगी।
इसके बाद मंदिर के तांत्री (मुख्य पुजारी) और मेलशांति (प्रधान पुजारी) मिलकर सुनहरे वस्त्र को ग्रहण करेंगे और शाम की 'दीपाराधना' से पहले भगवान अयप्पा की मूर्ति को इन सुनहरे वस्त्रों से सजाया जाएगा। टीडीबी अधिकारियों ने बताया कि 'अंकी' से सजी देवता की 'मंडला पूजा' 27 दिसंबर की दोपहर को की जाएगी। यह पूजा लगभग दो महीने तक चलने वाले वार्षिक तीर्थयात्रा मौसम के पहले चरण के समापन का प्रतीक है। इसके बाद मंदिर के कपाट कुछ समय के लिए बंद होंगे और फिर मकरविलक्कू उत्सव के लिए खोले जाएंगे।