Kerala: त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने सबरीमाला मंदिर में सोने की परत चढ़ाने में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए केरल हाईकोर्ट से अपील करने की घोषणा की है। बोर्ड ने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक मकसद से मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं और सोने की कमी व दुरुपयोग के झूठे आरोप लगा रहे हैं।
त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने शनिवार को घोषणा की कि वह सबरीमाला मंदिर में सोने की परत चढ़ाने में कथित अनियमितताओं की पूरी तरह से जांच के लिए केरल हाईकोर्ट का रुख करेगा। पत्रकारों से बात करते हुए टीडीबी अध्यक्ष पी एस प्रसांत ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे इस विवाद को एक सुनहरा मौका समझकर बोर्ड को निशाना बना रहे हैं।
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उन्होंने कहाकि हाईकोर्ट से यह अनुरोध किया कि जाएगा कि 1998 से अब तक की पूरी जांच कराई जाए, जब उद्योगपति विजय माल्या ने मंदिर के गर्भगृह में सोना चढ़ाने का खर्ज उठाया था। इस बात की जांच हो कि सोने की मात्रा में कोई कमी आई है या नहीं और क्या कुछ लोगों ने प्रायोजक के नाम पर इसका गलत फायदा उठाया है।
प्रसांत ने कहा कि हाल ही में आयोजित हुए वैश्विक अयप्पा संगमम को व्यापक समर्थन मिला, उसके बाद से सबरीमाला मंदिर को लेकर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि टीडीबी 1998 से 2025 तक की जांच की मांग करेगा, जिसमें सोने के वजन में गड़बड़ी और इसमें शामिल व्यक्ति की जांच शामिल होगी। उन्होंने कहा, कोर्ट 1998 से लेकर 2025 तक के सबरीमाला से जुड़े मामलों की जांच करे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब द्वारपालक मूर्तियों की सोने की परत दोबारा चढ़ाने के लिए उन्हें चेन्नई भेजा गया, तब सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी की गई थीं। प्रसांत ने कहा कि इन्हें तिरुवाभरणम आयुक्त की निगरानी में कार्यकारी अधिकारी और सतर्कता अधिकारियों की मौजूदगी में भेजा गया था। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी और शुरुआत व अंत में महसर (सूची) तैयार की गई थी। सोना पुलिस सुरक्षा के साथ एक सुरक्षित वाहन में ले जाया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रायोजक उन्नीकृष्णन को केवल चेन्नई बुलाया गया था, लेकिन उन्हें कभी भी सोना नहीं सौंपा गया।
बाद में टीडीबी ने एक बयान में कहा, सबरीमाला जैसे मंदिर की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। इसलिए बोर्ड पूरी जांच की मांग कर रहा है। अगर किसी ने गलत किया है, तो उसे सजा मिलनी चाहिए। लेकिन राजनीतिक मकसद से बोर्ड और मंदिर की पवित्रता पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया जा रहा है। बोर्ड के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और इसी वजह से हम कोर्ट-निगरानी में जांच की मांग कर रहे हैं।