केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने सबरीमाला सोना मामले में विपक्ष के हंगामे को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने जांच की तारीफ की है। वहीं, विपक्ष ने मुख्यमंत्री कार्यालय पर जांच में दखल देने और आरोपियों को जमानत दिलाने के लिए चार्जशीट में देरी करने का आरोप लगाया है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष के व्यवहार पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के विरोध प्रदर्शन को निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण कहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि केरल हाई कोर्ट की एक बड़ी बेंच सबरीमाला मंदिर से सोना गायब होने के मामले की जांच की निगरानी कर रही है। इस बेंच ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) के काम की सराहना की है।
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क्या बोले मुख्यमंत्री विजयन?
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एक जज ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के समय जांच की आलोचना की थी, लेकिन इसे पूरी जांच के प्रति असहमति नहीं कह सकते। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हाई कोर्ट की बड़ी बेंच की टिप्पणियां विपक्ष के लिए मुंह पर तमाचा हैं। उन्होंने विधानसभा में कहा कि विपक्षी विधायकों ने पहले हंगामा किया और फिर स्पीकर के मंच पर चढ़ गए। उन्होंने सदन के सुरक्षा कर्मचारियों पर भी हमला किया।
विजयन ने इसे सदन के इतिहास में पहली बार हुई घटना बताया। उनका कहना है कि विपक्ष जानबूझकर सदन में समस्याएं पैदा कर रहा है क्योंकि उनके बाहरी प्रदर्शनों पर जनता या मीडिया ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने विपक्ष के नेता वी डी सतीशन की भी निंदा की क्योंकि उन्होंने विधायकों के हिंसक कृत्यों को सही ठहराया।
विपक्ष ने लगाए आरोप
दूसरी ओर, यूडीएफ ने मुख्यमंत्री कार्यालय पर जांच में दखल देने का आरोप लगाते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। विपक्ष का दावा है कि सरकार गिरफ्तार आरोपियों को संरक्षण दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी पर दबाव डालकर चार्जशीट दाखिल करने में देरी की जा रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है ताकि आरोपियों को जमानत मिल सके। कानून के अनुसार, अगर गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी को जमानत मिल जाती है।
क्या है मामला?
यह मामला मंदिर के रक्षक देवता की मूर्ति की प्लेटों और गर्भगृह के दरवाजों से सोने की परत गायब होने से जुड़ा है। एसआईटी ने अब तक इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से तीन आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को भी एक मामले में जमानत मिल गई है और दूसरे मामले में भी उसे जल्द राहत मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को गलत बताते हुए जांच को निष्पक्ष बताया।