विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि आज भारत एक ऐसा देश बन गया है, जिससे दुनिया को बड़ी उम्मीदे हैं और जिसके पास ज्यादा जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य में एक ऐसे देश के रूप में देखा जाएगा, जो दुनिया की समस्याओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।
जयशंकर ने कहा कि भारत से उम्मीद की जाएगी कि वह दुनिया की समस्याओं का समाधान निकालने में मदद करे, खासकर हमारे पड़ोसी देशों में। विदेश मंत्री ने कहा, हम जिन भी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, उनका समाधान साझा प्रयासों और फैसलों से होगा। दुनिया बदल रही है। नए विचार आ रहे हैं और भारत को इन बदलावों का हिस्सा बनना होगा। हमें अपनी विदेश नीति को बड़ी सोच और दीर्घकालिक दृष्टि और समझदारी के साथ आगे बढ़ाना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव केवल विदेश नीति से नहीं जुड़ा है, बल्कि यह भारत के विकास के लिए एक बड़ा अवसर भी है। उन्होंने कहा, आज हम जो आपूर्ति श्रृखलाओं में बदलाव देख रहे हैं, वह भारत में विनिर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं और तकनीकी विकास के लिए भी प्रेरक का काम कर रहे हैं। डिजिटल युग में विदेश नीति के लिए भी नए दृष्टिकोण की जरूरत है, क्योंकि यह युग विनिर्माण के युग से पूरी तरह अलग है। डिजिटल उत्पाद केवल उत्पाद नहीं रह गए, बल्कि वे अब डाटा के स्रोत बन गए हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि विदेश नीति एक ऐसा मिश्रण है, जिसमें पुरानी और नई दोनों चुनौतियां शामिल हैं। उन्होंने कहा, हमने कई पुराने मुद्दों का सामना किया है, जिनमें से कई अब भी मौजूद हैं। हमारी सीमा सुरक्षा भी एक गंभीर मुद्दा है और हम अभी भी आतंकवाद के गंभीर रूप से लड़ रहे हैं। इसके साथ ही हमें आज की जरूरतों के अनुसार विदेश नीति को राष्ट्रीय विकास के लिए क्रियान्वित करना पड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत की विदेश नीति में आर्थिक कूटनीति पर ज्यादा जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जब भी विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो उनके एजेंडे में प्रौद्योगिकी, पूंजी, सहयोग, निवेश और सर्वोत्तम प्रथाओं का बड़ा स्थान होता है। यह अब विदेश नीति का एक अहम हिस्सा बन चुका है।
मॉल्डोवा के दूतावास का उद्घाटन
नई दिल्ली में मॉल्डोवा के दूतावास के उद्घाटन समारोह में जयशंकर ने कहा, 'हम मानते हैं कि इस दूतावास की स्थापना से हमारे संबंधों का नया अध्याय शुरू होगा। इसके शुभारंभ के अवसर पर हम संकल्प लें कि हम एक ऐसी दुनिया बनाएंगे जहां साझा मूल्य और विचार हों। इस दूतावास को मित्रता का प्रतीक बनाया जाएगा। मैं उम्मीद करता हूं कि निकट भविष्य में मॉल्डोवा में भी एक भारतीय दूतावास होगा।'