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INS Tushil: भारत के युद्धपोत में रूस के साथ यूक्रेन की भी हिस्सेदारी! जंग के बावजूद कैसे हुआ निर्माण, जानें

Tue, 10 Dec 2024 09:28 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रूस में बने इन दो फ्रिगेट में लगने वाले मुख्य इंजन यानी फ्रिगेट की गैस टर्बाइन्स, जो शिप को ताकत देंगी, वह यूक्रेन में बनी हैं।
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आईएनएस तुशिल - फोटो : ANI
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विस्तार
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रूस और यूक्रेन के बीच बीते ढाई साल से संघर्ष जारी है। दोनों ही देशों की तरफ से एक-दूसरे पर हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, इस बीच दोनों देश एक अहम कार्यक्रम के लिए साथ भी आए हैं। यह था भारतीय नौसेना के लिए एक युद्धपोत तैयार करने में, जिसे सोमवार को ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में भारत को सौंपा गया। 
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फ्रिगेट आईएनएस तुशिल उन दो नौसैनिक पोतों में शामिल है, जिनका ऑर्डर भारत ने रूस को 2016 में दिया था। आईएनएस तुशिल क्रिवाक III-क्लास युद्धपोत, जो कि एक आधुनिक स्टेल्थ मिसाइल फ्रिगेट है। भारत के पास मौजूदा समय में ऐसे छह युद्धपोत हैं और सभी रूस में बने हैं।

रूस में बने इन दो फ्रिगेट के अलावा ऐसे ही दो और पोत भारत में भी बन रहे हैं और इनके गोवा स्थित शिपयार्ड में बनने के कयास हैं। हालांकि, इस पर अभी जानकारी आनी बाती है। चौंकाने वाली बात है इन पोत में लगने वाले मुख्य इंजन यानी फ्रिगेट की गैस टर्बाइन्स, जो शिप को ताकत देंगी, वह यूक्रेन में बनी हैं। यानी भारत के लिए युद्धपोत रूस में बना और इसमें इंजन लगे यूक्रेन के। ऐसा संभव हुआ है भारत के दोनों देशों से बेहतरीन रिश्तों के चलते।
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गौरतलब है कि भारत में नौसेना में इस्तेमाल होने वाले अधिकतर पोतों में लगी गैस टर्बाइन का उत्पादन यूक्रेन की कंपनी जोरया-माशप्रोएक्त करती है। इसे वैश्विक स्तर पर जलीय गैस टर्बाइन के उत्पादन के लिए जाना जाता है। इस पूरे ऑर्डर की सबसे बड़ी बात यह है कि युद्ध के बावजूद रूस और यूक्रेन की मदद से भारत को यह पोत मिल गया है। 

इस पूरे ऑर्डर को पूरा करने में भारत को एक चुनौती का भी सामना करना पड़ा है। उसे यूक्रेन से इन इंजन को खुद जाकर हासिल करना पड़ा और फिर इन्हें रूस तक पहुंचाना पड़ा, ताकि इन्हें युद्धपोत पर लगाया जा सके। ऐसे में पहले पोत की डिलीवरी में काफी समय भी खर्च हुआ है।

जानिए आईएनएस तुशिल की खासियत
आईएनएस तुशिल प्रोजेक्ट 1135.6 का एक उन्नत क्रिवाक III श्रेणी का युद्धपोत है। इनमें से छह पहले से ही सेवा में हैं, जिसमें तीन तलवार श्रेणी के जहाज, बाल्टिस्की शिपयार्ड, सेंट पीटर्सबर्ग में निर्मित और तीन तीन फॉलो-ऑन तेग श्रेणी के जहाज, यंतर शिपयार्ड, कलिनिनग्राद में निर्मित हैं। आईएनएस तुशिल इस श्रृंखला में सातवां और दो उन्नत अतिरिक्त फॉलो-ऑन जहाजों में से पहला है। इसके लिए अक्तूबर 2016 में जेएससी रोसोबोरोनेक्सपोर्ट, भारतीय नौसेना और भारत सरकार के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे।

इन हथियारों से लैश हैं आईएनएस तुशिल
इस युद्धपोत की लंबाई 409.5 फीट, बीम 49.10 फीट और ड्रॉट 13.9 फीट है। यह समुद्र में 59 किमी प्रति घंटे के रफ्तार से चल सकता है। यह समुद्र में 18 अधिकारियों समेत 180 सैनिकों को लेकर 30 दिनों तक रह सकता है। आईएनएस तुशिल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस हैं। इसमें 4 केटी-216 डिकॉय लॉन्चर्स लगे हैं। इसमें एक 100 मिलिमीटर की ए-190ई नेवल गन भी लगी है। इसके अलावा इसमें एक 76 मिमी की ओटो मेलारा नेवल गन और 2 एके-630 सीआईडब्ल्यूएस और 2 काश्तान सीआईडब्ल्यूएस गन लगी हैं।

इन खतरनाक बंदूकों के अलावा इस युद्धपोत में दो 533 मिलिमीटर की टॉरपीडो ट्यूब्स भी लगे हैं। इसमें एक रॉकेट लॉन्चर भी तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त इस जहाज पर एक कामोव-28 या एक कामोव-31 या ध्रुव हेलिकॉप्टर लैस हो सकता है। 
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