भारत को सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल प्रणाली (S-400 Missile System) की जल्दी आपूर्ति करने के लिए रूस कड़ी मेहनत कर रहा है। रूसी मिशन के उप प्रमुख रोमन बबुशिकन ने गुरुवार को यह जानकारी दी। इस मिसाइल प्रणाली की पहली खेप की आपूर्ति अगले साल के अंत तक होनी है।
एक ऑनलाइन प्रेस ब्रीफिंग में बबुशिकन ने कहा कि दोनों पक्ष परस्पर साजोसामान समर्थन (लॉजिस्टिक सपोर्ट) समझौते पर काम कर रहे हैं। दोनों पक्ष अरबों डॉलर के सौदे के करीब हैं जिसके तहत एक भारत-रूस संयुक्त उपक्रम भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 200 कामोव केए-226टी युद्धक हेलीकॉप्टरों का उत्पादन करेगा।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत और रूस ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें फिलीपींस और कुछ अन्य देशों को निर्यात करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश कई अन्य सैन्य खरीद कार्यक्रमों पर भी काम कर रहे हैं। इनमें भारत को एसयू-30 एमकेआई विमानों की पहली खेप की आपूर्ति शामिल है।
वहीं, इस सवाल का उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या भारत व अमेरिका के बीच हुए मूल विनिमय और सहयोग समझौता (बेका) का भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा रूसी मूल के प्लेटफार्मों के संचालन में कोई प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत-रूस के रक्षा संबंध किसी भी प्रतिबंध और विदेशी हस्तक्षेप से परे हैं।
उन्होंने कहा, ‘हम भारत और अमेरिका सहित अन्य देशों के बीच रणनीतिक क्षेत्रों में संबंधों को काफी करीब से देख रहे हैं। लेकिन हमें पूरा भरोसा है कि अन्य देशों के साथ भारत के संबंध रूस के हितों की कीमत पर नहीं होंगे। हम अपने संबंधों में प्रगति के लिए आत्मविश्वास की भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं।’
उल्लेखनीय है कि भारत ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की चेतावनी के बीच अक्तूबर 2018 में एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों की पांच इकाइयों को खरीदने के लिए रूस के साथ पांच अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
उन्होंने कहा कि एक भारत-रूस संयुक्त उपक्रम के तहत सात लाख एके-47 203 राइफलों के निर्माण के लिए समझौता और कामोव हेलीकॉप्टर सौदा अंतिम चरण में हैं। भारत और रूस ने दो महीने पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मॉस्को यात्रा के दौरान एके-203 राइफलों के निर्माण के लिए करार को अंतिम रूप दिया था।
इसके अलावा भारत और रूस ने अक्तूबर 2016 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और दो रूसी रक्षा कंपनियों के बीच संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए एक व्यापक समझौते को अंतिम रूप दिया था। इसके तहत भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 200 कामोव केए-226टी हेलिकॉप्टर खरीदे जाएंगे।