पीपीई कीट पहनकर दाह संस्कार करते लोग।
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कोरोना की दूसरी लहर ने देश में जबरदस्त कहर बरपाया है। रोज लाखों केस और सैकड़ों मौतों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल कोरोना महामारी की दूसरी लहर धीमी पड़ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस से मई में हुई कुल मौतों में से 52 फीसदी ग्रामीण भारत में हुई।
कोरोना महामारी ने हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की पोल खोल कर रख दी। सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरमेंट की रिपोर्ट में यह बताया गया कि कोरोना की दूसरी लहर से इस बार गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में कोरोना के 53 फीसदी नए केस और 52 फीसदी मौतें ग्रामीण जिलों में हुई हैं। मई में देश में 94.12 लाख कोरोना वायरस संक्रमण के मामले और 1.23 लाख मौतें दर्ज की गई हैं। अप्रैल में, भारत में 64.81 लाख संक्रमण और 45,862 मौतें दर्ज की गईं। इसकी तुलना में मई में संक्रमण से 43 फीसदी और मौतों में 163 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राहत की बात है कि लगभग दो महीने बाद पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के सबसे कम 120454 नए मामले सामने आए हैं। हालांकि इस दौरान 3349 लोगों की जान गई।
ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवा लचर
रिपोर्ट बताती है कि मीण भारत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 76 फीसदी अधिक डॉक्टरों, 56 फीसदी अधिक रेडियोग्राफरों और 35 फीसदी अधिक लैब तकनीशियनों की आवश्यकता है। रिपोर्ट इनकी गंभीर कमी को दर्शाता है।
डाउन टू अर्थ पत्रिका के लेखक रिचर्ड महापात्रा के मुताबिक, एक महत्वपूर्ण जानकारी ये सामने आ रही है कि दूसरी लहर में भारत विश्व स्तर पर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है और ग्रामीण भारत हमारे शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक प्रभावित हुआ है।
रिपोर्ट के प्रमुख लेखकों में से एक रजित सेनगुप्ता कहते हैं कि महामारी के आर्थिक प्रभाव बहुत गंभीर हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने लिखा कि महामारी का ग्रामीण जिलों में फैलने का मतलब है कि देश को ठीक होने में अधिक समय लगेगा। इससे अगले साल जीडीपी वृद्धि धीमी होने की संभावना है।