केंद्रीय बजट 2025-26 में ग्रामीण विकास मंत्रालय को 1.88 लाख करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 5.75 फीसदी ज्यादा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की।
मनरेगा को पहले जितना ही फंड मिला
सरकार की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के लिए 86,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल के बराबर है। 2023-24 में मनरेगा के लिए पहले 60,000 करोड़ रुपये दिए गए थे, लेकिन बाद में बढ़ाकर 89,153.71 करोड़ रुपये कर दिए गए थे।
महामारी के समय में मिला था ज्यादा पैसा
कोविड-19 महामारी के दौरान 2020-21 में मनरेगा के तहत 1,11,169 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जिससे लाखों लोगों को गांवों में रोजगार मिला था। लेकिन इस बार सरकार ने 2024-25 के मुकाबले कोई अतिरिक्त राशि देने का ऐलान नहीं किया है।
'ग्रामीण समृद्धि और सशक्तिकरण' कार्यक्रम की घोषणा
वित्त मंत्री ने 'ग्रामीण समृद्धि और सशक्तिकरण' कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। यह योजना कृषि में रोजगार बढ़ाने, कौशल विकास, निवेश और टेक्नोलॉजी के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देगी। उन्होंने कहा, 'हम ग्रामीण भारत में इतने अवसर पैदा करेंगे कि लोगों को मजबूरी में शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।' इस योजना का विशेष ध्यान महिलाओं, छोटे किसानों, भूमिहीन मजदूरों और युवाओं पर रहेगा।
गांवों के विकास के लिए अन्य योजनाओं का फंड
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना – 19,000 करोड़ रुपये, पिछले साल से 58% ज्यादा
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – 19,005 करोड़ रुपये, पिछले साल से 26% ज्यादा
- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण – 54,832 करोड़ रुपये, जो पिछले साल के लगभग बराबर है
सरकार का लक्ष्य – आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत
वहीं केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि यह 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, 'अगर गांव गरीबी से मुक्त होंगे, तो देश गरीबी से मुक्त होगा।' सरकार का कहना है कि यह बजट गांवों के विकास में अहम भूमिका निभाएगा और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा।