इसके अलावा मंत्रालय में हिन्दी जानने वाले 20 स्टेनोग्राफर्स को उन अफसरों के साथ लगाया जाए, जो हिन्दी का प्रयोग करना चाहते हैं। सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय के सभी आधिकारिक संचार और पत्राचार हिन्दी में होने चाहिए, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। मंत्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पूरा कामकाज हिन्दी में हो।
ग्रामीण विकास मंत्रालय पर केंद्र सरकार की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं जिसमें मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, ग्राम स्वराज अभियान और ग्रामीण आजीविका जैसी कई योजनाओं की जिम्मेदारी है, जो सीधे देश के ग्रामीण इलाकों से जुड़ी हुई हैं।
सूत्रों का कहना है कि हिन्दी के इस्तेमाल को लेकर मंत्रालय में इतना जबरदस्त दबाव है कि हिन्दी नहीं जानने वाले अधिकारियों को हिन्दी सीखने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के लिए बोल दिया गया है। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पुस्तकालयों से हिन्दी किताबों की खरीद करने के लिए भी बोला जा चुका है।
मई 2015 में, एनडीए सरकार ने एक आदेश जारी किया था जिसमें आधिकारिक भाषा अधिनियम, 1963 के अनुसार सभी सरकारी दस्तावेज हिंदी और अंग्रेजी में द्विभाषी रूप से जारी किए जाएंगे। वहीं फरवरी 2015 में भी सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में 'हिंदी के प्रगतिशील उपयोग को सुनिश्चित करने' के लिए हिंदी सलाहकार समिति का गठन भी किया था।
इसके अलावा गृह मंत्रालय पहले ही सभी नौकरशाहों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बने मंत्रालयों के आधिकारिक अकाउंट्स पर अंग्रेजी की बजाय हिंदी को प्राथमिकता देने का निर्देश जारी कर चुका है।