नतो महाराष्ट्र और न ही झारखंड की सत्ता में बदलाव हुआ। इसकी बड़ी वजह आधी आबादी का महिलाओं से जुड़ी योजनाएं शुरू करने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन पर जताया गया भरोसा भी रहा। महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के बाद शुरू की गई लाडकी बिहन योजना और झारखंड में मइया सम्मान योजना गेमचेंजर साबित हुई। इसके बदले आधी आबादी ने महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति की तो झारखंड में झामुमो की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक की झोली वोटों से भर दी।
आधी आबादी बनी गेम चेंजर
आधी आबादी को साधने के लिए दोनों ही राज्यों में विपक्ष ने जवाबी योजनाएं शुरू करने का वादा किया था। महाराष्ट्र में एमवीए ने महिलाओं को महायुति सरकार के 1500 रुपये प्रतिमाह के मुकाबले 3000 रुपये प्रतिमाह तो झारखंड में भाजपा ने इंडिया ब्लाक की 1000 रुपये प्रतिमाह की तुलना में गोगो दीदी योजना के तहत 2100 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया। बावजूद इसके आधी आबादी ने दोनों ही राज्यों में सत्तारूढ़ गठबंधन पर ही भरोसा जताया।
मत प्रतिशत बढ़ाने में भी रही भूमिका
महिला केंद्रित योजनाओं के कारण दोनों राज्यों की कई सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक मतदान किया। झारखंड में तो 81 में से 68 सीटों पर महिलाएं मतदान करने के मामले में पुरुषों पर भारी पड़ीं। दोनों ही राज्यों में महिलाओं के बढ़े मतदान प्रतिशत का सीधा लाभ सत्तारूढ़ गठबंधन को मिला।
विपक्ष के वादों का असर क्यों नहीं?
बड़ी राशि देने के वादे के बावजूद आधी आबादी का झुकाव सत्तारूढ़ गठबंधन की तरफ ही रहा। दरअसल मतदान संपन्न होने से पहले महाराष्ट्र की सरकार महिलाओं के खाते में योजना की पांच किश्तें डाल चुकी थी। इसी प्रकार झारखंड में भी मइया योजना के तहत महिलाओं के खाते में चार किश्तें पहुंच चुकी थी। आधी आबादी को भरोसा था कि पुरानी सरकार कायम रहने पर यह योजना जारी पहले की तरह जारी रहेगी। फिर दोनों ही राज्य सरकारों ने नतीजे के बाद इस योजना की राशि में बड़ी बढ़ोत्तरी का वादा किया था। यही कारण है कि विपक्ष के बड़े वादे पर आधी आबादी ने ज्यादा भरोसा नहीं किया।
लाडली बहना योजना रोल मॉडल
आधी आबादी को साधने के लिए महिला केंद्रित योजना की शुरुआत मध्य प्रदेश का सीएम रहते शिवराज सिंह चौहान ने की थी। उनकी लाडली बहना योजना ने उन्हें खासी लोकप्रियता के साथ मामा की उपाधि दी। इस योजना के कारण शिवराज लगातार चुनाव जीतते रहे। बाद में इसकी देखा देखी कई और राज्यों में सत्तारूढ़ दलों ने इस फार्मूले को अपना कर जीत दर्ज की।
पहली बार किसी गठबंधन की सत्ता में वापसी
राज्य में इंडिया गठबंधन को पिछली बार के मुकाबले सात सीटें ज्यादा मिली हैं। वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर अस्तित्व में आए राज्य में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी गठबंधन ने सत्ता में वापसी की है। राज्य में हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन का चलन रहा है। यही वजह है कि राज्य के 24 साल के इतिहास में अब तक कुल 13 मुख्यमंत्री हो चुके हैं।